नोटबंदी लागू करने का फैसला कठिन था,लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी था। यह कहना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। आठ नवंबर के अपने नोटबंदी के फैसले के पहली बार इस मुद्दे पर किसी मीडिया हाउस को साक्षात्कार दिया है। इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में पीएम ने नोटबंदी पर अपनी राय रखी। उन्होंने इससे पैदा हुई चुनौतियों और उनके हलों पर भी बात की।
साक्षात्कार के मुख्य पांच बातें:
- नोटबंदी का फैसला इतना बड़ा है कि हमारे सबसे अच्छे अर्थशास्त्री भी अपनी गणनाओं में भ्रमित हो गए। भारत के 1.25 करोड़ नागरिकों ने बड़ी कठिनाइयां उठाने के बावजूद इसके प्रभाव और महत्व को समझते हुए इस फैसले का स्वागत और समर्थन किया।
– बार-बार फैसले बदलने को लेकर आलोचना का शिकार हुए पीएम ने कहा कि जैसे ही परेशानी हमारे सामने आई, हमने उसे सुलझाने का प्रयास किया। डिजिटल लेन-देन से कई फायदे होते हैं। इससे छोटे कारोबार और आम लोगों को आसानी होती है। इससे टैक्स के भुगतान में भी सहायता मिलेगी।
– कालेधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और माओवादियों पर लगाम लगाने के लिए हमने यह कदम उठाया। हमने यह फैसला छोटे समय के लिए नहीं, लंबे समय के लिए लिया है। भ्रष्टाचार की किसी भी बात को राजनीति से जोड़ने का जो फैशन चल पड़ा है वह खतरनाक जाल बन गया है। इससे कई दोषियों को छिपने का मौका मिल जाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं राजनीति में भ्रष्टाचार की मौजूदगी से इनकार करता हूं।
– हाल में हुए बदलावों के बारे में, आपको नीति और रणनीति में फर्क करना होगा, उन्हें एक नजर से देखने की जरूरत नहीं है। नोटबंदी का फैसला हमारी नीति दिखाता है। हालांकि हमारी रणनीति को अलग होना ही था, पुरानी कहावत के जैसे- तू डाल-डाल, मैं पात-पात” ताकि दुश्मन से एक कदम आगे रहा जा सके।
– मुझे अपने विरोधियों पर तरस आता है, खासतौर से कांग्रेस नेतृत्व पर, उनकी बेचैनी साफ नजर आ रही है। एक तरफ, वह कहते हैं कि यह फैसला राजनैतिक लाभ के लिए लिया गया है, दूसरी तरफ वह कहते हैं कि लोगों को परेशानी हो रही है और वे बेहद नाखुश हैं। दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती हैं?