लगभग 600 साल पुराने रविदास मंदिर को तोड़ दिए जाने के बाद दिल्ली का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। लेकिन अब इसके दोबारा बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले पर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह सभी समाज की भावनाओं का आदर करती है। तुगलकाबाद में डीडीए के तोड़े गए मंदिर की जगह एक सर्वमान्य विकल्प के साथ सभी पक्षों को आना चाहिए, जिससे इस मामले का उचित समाधान किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए अटॉर्नी जनरल से समाधान तलाश करने को कहा है।
दरअसल, दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर डीडीए के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि डीडीए ने इस मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले की मनमानी व्याख्या की और मंदिर तोड़ने की कार्रवाई की। उनके मुताबिक डीडीए की इस कार्रवाई से अनुसूचित समाज के लोगों को पूजा करने के मौलिक अधिकार से वंचित होना पड़ा है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट के मंदिर निर्माण के सर्वमान्य हल पर पहुंचने की बात पर उन्होंने संतुष्टि जाहिर की है।
नौ अगस्त को सर्वोच्च अदालत ने तुगलकाबाद के वन क्षेत्र में स्थित निर्माण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद दस अगस्त को डीडीए ने रविदास मंदिर ढहा दिया था। इसके बाद से ही इलाके में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। अनुसूचित समाज के कई संगठनों ने इसके बाद प्रदर्शन भी किए थे। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त को इस मामले में राजनीति न करने के लिए भी कहा था।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम
- उच्चतम न्यायालय के आदेश पर डीडीए ने शनिवार 10 अगस्त को तुगलकाबाद वन क्षेत्र में स्थित संत रविदास का मंदिर तोड़ा।
- 12 अगस्त को डीडीए ने एक बयान जारी कर कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर ढांचे को हटाया गया। मंदिर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।
- 13 अगस्त को जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने चेतावनी दी।
- 13 अगस्त को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने वैकल्पिक स्थान देने पर विचार करने की बात कही, उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की।
- 14 अगस्त को मायावती ने विरोध जताया।
- 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दुहराया कि उसके आदेश पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारें यह निश्चित करें कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।