एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह कहते हैं कि इतने लंबे समय तक फोर्स को प्रमुख विहीन रखना कोई स्वस्थ परंपरा नहीं है। डीजी पद पर नियुक्ति में देरी के चलते बल को कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने में देरी हो रही है।
वहीं वह अफसर कच्छ का रण क्षेत्र, सुंदरबन बांग्लादेश बार्डर से लेकर 55 डिग्री तपते रेगिस्तान वाले राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर की सीमा पर ड्यूटी कर चुका हो।
साथ ही, चमिलयांग-रामगढ़ सेक्टर या अन्य दूरदराज के सरहदी बंकरों में जवानों के साथ बॉर्डर की पहरेदारी की हो।
उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार अर्धसैनिक बलों की सीपीसी कैंटीन में स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल की शुरुआत कर सकती है तो फिर कैर अफसर को डीजी क्यों नहीं बना सकती।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस के आने की एक परंपरा सी बन गई है। दशकों से आईपीएस ही बल की कमान संभाल रहे हैं। अब कैडर अफसरों को बल का नेतृत्व सौंपना चाहिए।