राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने सरकार से संवैधानिक अधिकार देने की मांग की है। आयोग का कहना है कि अभी उसकी मान्यता गैर-संवैधानिक निकाय के तौर पर है, जिसके चलते सफाई कर्मचारियों को पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। वहीं कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जहां वे चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के वरिष्ठ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में आयोग के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए कई सफारिशें की हैं। अपनी सिफारिशों में आयोग ने मांग की है कि उन्हें संवैधानिक निकाय का दर्जा दिया जाए और एक पूर्ण आयोग को मिलने वाले सभी अधिकार उन्हें भी मिलें। आयोग के सूत्रों का कहना है कि उन्हें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की तरह दर्जा दिया जाए।
आयोग के सदस्य जगदीश हिरेमनी ने माना कि यह सही है कि अभी राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को एक गैर संवैधानिक निकाय के रूप में गिना जाता है। उन्होंने बताया कि भी आयोग के पास कई संवैधानिक शक्तियां नहीं, लेकिन मान्यता देने का फैसला सरकार के हाथों में हैं।