ट्रांसजेंडर के लिए आवेदन पत्रों, बुकिंग फार्म आदि में अलग कॉलम की व्यवस्था करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में रोडवेज, रेलवे, नागरिक उड्डयन विभाग आदि को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने इन सभी विभागों को जवाब दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
अधिवक्ता उर्वशी जैन की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की। याची का कहना है कि टिकट बुकिंग विंडों से कराते समय या ई टिकट लेने में जेंडर कॉलम में मात्र स्त्री या पुरुष का ही विकल्प होता है। ट्रांसजेंडर के लिए कोई अलग से कॉलम नहीं है। मजबूरी में इनको स्त्री या पुरुष का विकल्प चुनना पड़ता है क्योंकि टिकट पाने के लिए ऐसा जरूरी है। इसलिए बुकिंग फार्म में ट्रांसजेंडर के लिए भी एक कॉलम होना चाहिए।
इनके लिए अलग कॉलम नहीं रखना संविधान के अनुच्छेद 15, 15,16 और 21 का हनन है। यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों का प्रवर्तन करते हैं। अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए रेलवे, नागरिक उड्डयन और रोडवेज आदि विभागों से जवाब मांगा है। याचिका पर सितंबर पर सुनवाई होगी।