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बत्ती गुल : गर्मी से बढ़ी मांग और कोयले की किल्लत ने बढ़ाया बिजली संकट, सात राज्य विद्युत कटौती पर मजबूर

Sat, 23 Apr 2022 07:48 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर साल गर्मी के सीजन में देश में बिजली की मांग चरम पर होती है, लेकिन कोयले की कमी के कारण कई राज्यों में संकट गहरा गया है।
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power crisis in seven states - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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देश के कई राज्यों में मार्च मध्य से जारी ग्रीष्म लहर के कारण बढ़ी मांग और इसी बीच पैदा हुई कोयले की किल्लत से बिजली की कमी हो गई है। इस कारण सात राज्य घंटों बिजली कटौती करने पर मजबूर हो गए हैं। 

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हर साल गर्मी के सीजन में देश में बिजली की मांग चरम पर होती है, लेकिन कोयले की कमी के कारण कई राज्यों में संकट गहरा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गोवा व कर्नाटक में मध्य मार्च से ही गर्मी बढ़ गई थी। इस कारण इन राज्यों में बिजली की मांग एकदम बढ़ गई। 

ऐसे में इन राज्यों को उद्योगों व कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति का कार्यक्रम नए सिरे से निर्धारित करना पड़ा। इन्हें कई घंटों कटौती भी करना पड़ रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में देश के कुछ राज्यों को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। 
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बिजली की मांग 38 सालों की सर्वाधिक
देश में अप्रैल के पहले पखवाड़े में बिजली की मांग पिछले 38 सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसी बीच यूक्रेन संकट के कारण आयातित कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ने लगा। यही कारण देश के ताप बिजली घरों में कोयला का स्टॉक तेजी से घटने लगा। 

26 दिन का कोयला स्टॉक जरूरी
आमतौर पर कोयला संयंत्रों को पूर्ण क्षमता से चलाने के लिए 26 दिन का स्टॉक जरूरी है, लेकिन कोयले की प्रचूरता वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में भारी किल्लत हो गई। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो यह 36 फीसदी रह गया। कोयला बहुत राज्यों में ओडिशा, झारखंड व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। बंगाल में कोयले का स्टॉक सामान्य से 1 से 5 फीसदी, राजस्थान में 1 से 25 फीसदी, यूपी में 14 से 21 फीसदी व मप्र में 6 से 13 फीसदी रह गया। देश में राष्ट्रीय औसत स्टॉक भी पिछले सप्ताह सामान्य स्तर से दो फीसदी कम होकर 36 फीसदी रह गया। 

राज्य मांग रहे केंद्र से अतिरिक्त बिजली, हरियाणा करेगा कोयला आयात
देश में पीक अवर में बिजली की फिलहाल कुल मांग 1,88,576 मेगावाट की बताई जा रही है। इसमें 3,002 मेगावाट की ही कमी बताई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर कई राज्य भारी कमी झेल रहे हैं। उन्हें कटौती पर मजबूर होना पड़ रहा है। यही कारण है कि राज्य केंद्र से अतिरिक्त बिजली मांग रहे हैं। मध्य प्रदेश व पंजाब भी केंद्र से ज्यादा बिजली मांग रहे हैं। वहीं, हरियाणा ने पहली बार अपने ताप बिजली घरों के लिए 10 सालों में पहली बार कोयले के आयात का फैसला किया है।

एक माह तक उपयोग के लिए भरपूर कोयला रोजाना हो रही आपूर्ति
कोयले की कमी को नकारते हुए देश के कोयला व खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ किया है कि देश में एक महीने से ज्यादा समय तक उपयोग करने के लिए भरपूर कोयला है। इसकी रोजाना पूर्ति हो रही है। वहीं कोयला उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर है। तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी पर जोशी ने साफ किया कि इस समय विभिन्न उत्पादन स्रोतों के पास 72.5 मीट्रिक टन कोयला है। 

इनमें कोल इंडिया, एससीसीएल, वॉशरीज (जहां कोयला छांटा और शुद्ध किया जाता है) शामिल हैं। दूसरी ओर खुद संयंत्रों के पास भी 22.01 मीट्रिक टन कोयला मौजूद है। उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में 777.23 मीट्रिक टन कोयला उत्पादन प्रारंभिक अनुमान है। पिछले वर्ष में यह आंकड़ा 721 टन था, यानी करीब साढ़े प्रतिशत वृद्धि हुई है।

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