ठीक से बोल नहीं पाने वाले व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है। बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
आर कंसल ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि ठीक से बोल नहीं पाने वाले व्यक्ति को शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन उन्हें सरकारी नौकरियों में इसका लाभ नहीं मिलता। कंसल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकील वाई बंसल ने कहा कि केंद्र सरकार ठीक से बोलने में असमर्थ लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
सरकारी नौकरियों में इन लोगों को आरक्षण नहीं देना पूरी तरह से भेदभाव है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को कोटा नहीं दिया जाना सीधे तौर पर विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 4 जनवरी, 2018 को आदेश जारी कर एक समिति गठित की थी, जिसे इस अधिनियम के तहत ठीक से बोलने में असमर्थता सहित 12 नए तरह की विकलांगता पर गाइडलाइन तय करना था।