आपातकाल के दौरान मीसा और डीआईआर कानून के तहत सरकारी उत्पीड़न का शिकार हुए लोगों ने महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर प्रधानमंत्री से स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा मांगा है। साथ ही संविधान में संशोधन कर आपातकाल के इस्तेमाल को भी प्रतिबंधि करने की मांग की। अखिल भारतीय लोकतंत्र सेनानी संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जुटे देश भर के आपातकाल पीड़ितों ने शेष 20 राज्यों में भी पेंशन की मांग की।
समिति ने सरकार को यूपी, राजस्थान, पंजाब और मद्रास हाईकोर्ट के फैसलों की याद दिलाई, जिसमें सरकारों को ऐसे पीड़ितों को उचित सम्मान देने का निर्देश दिया गया था। समिति के अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद अटल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हजारों लोगों को मीसा के तहत जेल में बंद कर उनके परिवारों को तबाह कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे कई राज्य ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन दे रही है, जबकि 20 राज्य अब तक पेंशन देने के लिए तैयार नहीं हैं। समिति ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर इन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने के साथ-साथ आपातकाल में पीड़ितों की सूची की जांच कराने को भी कहा है।
समिति के प्रभारी नरेश गुप्ता ने कहा कि सरकार संविधान में यह व्यवस्था करे कि भविष्य में कोई तानाशाही का सहारा ले कर देश पर आपातकाल न थोप सके। बैठक में यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, असम, मणिपुर सहित अन्य राज्यों के आपातकाल के पीड़ितों ने हिस्सा लिया।