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उड़ानों पर स्मॉग का असर: धुंध के चलते देरी से दिल्ली पहुंचे मेसी, जानें विमानन सेवा पर कितना असर; हल क्या?

Mon, 15 Dec 2025 08:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

दिल्ली में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता का असर अब उड़ान सेवाओं पर भी पड़ने लगा है। फुटबॉलर लियोनल मेसी की फ्लाइट भी देरी से लैंड हुई। स्मॉग के चलते दिल्ली में विमान सेवा प्रभावित हुई है। 
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दिल्ली प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थिति यह है कि पिछले करीब तीन दिनों से उत्तर भारत के इस इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 के करीब या इससे भी ऊपर पहुंचा है। इस स्थिति के चलते दिल्ली में दो दिन पहले ग्रैप-4 के तहत पाबंदियां लागू कर दी गईं, ताकि वायु गुणवत्ता को सुधारा जा सके। हालांकि, इसमें कोई खास सफलता मिलती नहीं दिख रही।  दरअसल, सोमवार को दिल्ली में स्मॉग की धुंध इतनी गहरी थी कि अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी की फ्लाइट भी थी, जिसकी लैंडिंग में काफी दिक्कतें आईं और देरी से लैंडिंग के चलते उनका अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाला कार्यक्रम देरी से शुरू हुआ। 
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 इस बीच दिल्ली में जबरदस्त धुंध की स्थिति से निपटने के लिए एयरपोर्ट से फ्लाइट्स के संचालन के लिए कैट-III अलर्ट लागू कर दिया गया। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग की स्थिति कितनी खराब है? दिल्ली एयरपोर्ट में उड़ानों के संचालन में इसका असर कैसे पड़ा है? किन-किन एयरलाइन कंपनियों पर स्मॉग का असर पड़ा है? इसके अलावा कैट-III क्या है, जिसे लागू कर के किसी एयरपोर्ट से उड़ान सेवा का सही संचालन सुनिश्चित कराया जाता है? आइये जानते हैं...

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दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग से स्थिति कितनी गंभीर?
हवा की धीमी गति और खराब मौसम ने दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है। सोमवार को लगातार तीसरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे से हुई। वहीं, स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इस कारण कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। वहीं, एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, रविवार सुबह राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 456 दर्ज किया गया। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह सात बजे को आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अशोक विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी, विवेक विहार और वजीरपुर में एक्यूआई 500 दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ एनसीआर के गाजियाबाद और नोएडा में यह आंकड़ा 450-500 के बीच है। 

दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग से स्थिति और ज्यादा गंभीर इसलिए भी है, क्योंकि यहां फॉग यानी धुंध के साथ प्रदूषक मिक्स हो रहे हैं, जिससे हवा और भारी और घनी हो रही है। इसके चलते कम ठंड होने के बावजूद स्मॉग की घनी चादर छाई रहती है और दृश्यता काफी कम कर देती है। हवा का बहाव न हो पाने की वजह से यह स्मॉग लगातार पूरे क्षेत्र में छाई रहती है और सड़क पर चलने वाले वाहनों से लेकर उड़ानों तक को बुरी तरह प्रभावित करती है। दिल्ली में बीते दो दिन से इस स्मॉग की वजह से दृश्यता काफी कम हुई है।  

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उड़ानों पर कितना पड़ा इस खराब हवा का असर?
दिल्ली में स्मॉग का कहर इस कदर जारी है कि रविवार देर रात से सोमवार के बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई एयरपोर्ट) से उड़ान भरने वाली और यहां लैंड होने वाली करीब 100 उड़ानें रद्द हुईं और 400 से ज्यादा देरी से उड़ीं या लैंड हुईं। इस स्थिति के चलते एयरपोर्ट पर दिन भर यात्री परेशान होते रहे। दिल्ली एयरपोर्ट ने खुद यात्रियों को इससे जुड़े अपडेट्स अपने एक्स पोस्ट पर मुहैया कराए। 

इस स्थिति का संज्ञान नागर विमानन मंत्रालय ने भी लिया। अपने एक्स हैंडल पर मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली और अन्य एयरपोर्ट्स पर जबरदस्त कोहरे की स्थिति है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है। इसके अलावा इंडिगो, एयर इंडिया और अन्य एयरलाइन कंपनियों ने भी अपनी उड़ानों के रद्द होने और इनके देरी से उड़ान भरने को लेकर पोस्ट किए। इसके अलावा यात्रियों को रिफंड लेने और फिर से टिकट बुक करने जैसी जरूरी जानकारियां भी दी गईं।
 

उड़ानों पर कैसे असर डालता है स्मॉग?
चूंकि फॉग और स्मॉग की वजह से दृश्यता प्रभावित होती है, इसलिए विमानों के उड़ान भरने और लैंडिंग में पायलटों को दिक्कतें आती हैं। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि विमान को लैंड कराने के लिए पायलट को एयरपोर्ट का रनवे तक नहीं दिखता। ऐसे में एयर ट्रैफिक कंट्रोल, ग्राउंड स्टाफ और कुछ अन्य तरीकों से ही विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव होती है। 

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इन स्थितियों में अधिकतर फ्लाइट्स का संचालन धीमा होता है। एयरलाइन कंपनियां इस स्थिति के मद्देनजर अपनी कई उड़ानों को रद्द भी कर देती हैं ताकि फ्लाइट्स की भारी भीड़ के चलते एयरपोर्ट पर ज्यादा जुटाव न हो और सभी उड़ानों को टेकऑफ और लैंडिंग का पर्याप्त समय और रनवे पर जगह मिल पाए। इसके साथ ही विमानों की लैंडिंग और उनके टेकऑफ के बीच एक सुरक्षित दायरा बनाया जा सके। 

क्या हैं कैट-III नियम, जिसे लागू कर उड़ान की जाएंगी सुरक्षित?
कैट-III से पहले यह जानना जरूरी है कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) क्या है। आईएलएस विमानों के लिए दिशा बताने वाली प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल कर पायलट खराब दृश्यता वाले माहौल में भी फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग करा लेते हैं। इस प्रणाली के तहत विमान की लैंडिंग पायलट सामने दिख रहे दृश्यों और रेडियो सिग्नल्स के आधार पर कराता है। इतना ही नहीं कई बार विमानों को रनवे पर ठीक ढंग से लैंड कराने के लिए तेज रोशनी वाली लड़ियों से भी मदद की जाती है। कम दृश्यता की स्थिति में यह तकनीक काफी कारगर साबित होती है और विमान की लैंडिंग के दौरान किसी भी हादसे को रोकने में मदद करती है। 

इस आईएलएस प्रणाली को चार वर्गों यानी कैटेगरी में बांटा गया है। यही कैटेगरी- कैट-I, कैट-II, कैट-III और कैट-IV कही जाती हैं। आईएलएस में यह सभी वर्गीकरण तब लागू होते हैं, जब पायलट को सामान्य स्थिति में रनवे को देखने में दिक्कत आती है और उसे लैंडिंग से जुड़े फैसले लेने होते हैं। यह वर्गीकरण डिसीजन हाइट (डीएच) और रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) पर निर्भर होते हैं। कुल मिलाकर इन मानकों के आधार पर ही पायलट फॉग या स्मॉग के दौरान खराब दृश्यता की स्थिति में भी विमान लैंड करा लेते हैं। 

डिसीजन हाइट विमान की वह न्यूनतम ऊंचाई होती है, जहां से पायलट को आईएलएस के नियमों के अनुसार लैंडिंग करनी होती है। वहीं आरवीआर वह दूरी होती है, जहां से पायलट रनवे पर रोशन की गई लाइट्स को या उस पर बनी हुई रेखाओं को देख सकता है।  

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भारत में कुल छह एयरपोर्ट ऐसे हैं, जो कैटेगरी-IIIबी के तहत लैंडिंग कराने के लिए तैयार हैं। इनमें दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, अमृतसर, बंगलूरू और कोलकाता शामिल हैं। हालांकि, अभी भारत में कैटेगरी-IIIसी प्रणाली से लैस एयरपोर्ट नहीं है। मौजूदा समय में सिर्फ अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित जॉन एफ. कैनेडी एयरपोर्ट और लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट ही कैट-IIIसी के लिए उपयुक्त एयरपोर्ट हैं। 

विमानन कंपनियों को तैयार करने पड़ते हैं हर स्थिति में उड़ने लायक विमान-पायलट
यह एयरलाइन कंपनियों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपनी फ्लाइट्स को कैट-IIIबी नियमों में लैंडिंग के लायक तैयार कर सकें। इसी तरह पायलट्स को भी हर स्थिति में लैंडिंग और उड़ान भरने के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे विमान, जो धुंध की परिस्थितियों में लैंडिंग के लिए जरूरी तकनीक नहीं रखते, उन्हें खराब मौसम-कम दृश्यता में उड़ान की अनुमति भी नहीं दी जाती। हालांकि, एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अधिकतर घरेलू उड़ानों में कैट-IIIबी नियमों का पालन कम प्रशिक्षण के कारण मुश्किल होता है।

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