हिंदू धर्म में लड़कियों का विवाह कराने को एक पुण्य कार्य माना जाता है, इसीलिए आज भी समाज में कई लोग अपने खर्चे पर गरीब लड़के-लड़कियों की शादियां करवाते हैं। उनके इस पुण्य कार्य के लिए समाज में उन्हें सम्मान भी मिलता है। लेकिन इसी समाज में एक महिला ऐसी भी है जो लड़कियों की शादी कराने का नहीं, उलटे शादी तुड़वाने का काम करती हैं। लेकिन बावजूद इसके लोग उन्हें खूब पसंद करते हैं और उनकी सराहना करते हैं। उनकी इस खूबी के कारण लड़कियां उन्हें 'शादी तुड़वाने वाली दीदी' कहने लगी हैं।
नेहा फाउंडेशन नाम से एक स्वयंसेवी संस्था चला रही नेहा बताती हैं कि शादियां रोकने के लिए ज्यादातर वे समझाने की ही कोशिश करती हैं। ज्यादातर परिवार बेहतर काउंसलिंग के बाद मान जाते हैं, लेकिन कई बार उन्हें यह भी लगता है कि वे उनके व्यक्तिगत और सामाजिक मामले में दखल दे रही हैं। ऐसे में उन्हें खूब विरोध का सामना भी करना पड़ता है। कभी-कभी उन्हें पुलिस की मदद भी लेनी पड़ती है, लेकिन किसी भी कीमत पर वे कम उम्र की लड़कियों की शादी नहीं होने देतीं। हालांकि नेहा के मुताबिक अब आसपास के लोगों का साथ भी उन्हें मिलने लगा है और उनका काम कुछ आसान होने लगा है।
उन्होंने बताया कि यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली आने वाले ज्यादातर लोगों के सामाजिक संस्कार अभी भी पुरानी परंपराओं से जुड़े हुए हैं। उन्हें लगता है कि पंद्रह-सोलह साल की उम्र में लड़की की शादी कर दी जानी चाहिए। उनके बच्चे दिल्ली के बदलते माहौल में पल रहे हैं जहां छात्र-छात्राओं का एक दूसरे के साथ दोस्ती करना सामान्य बात है। लेकिन पुरानी सोच से जुड़े परिवार इसे लड़की के 'बिगड़ जाने' की तरह से लेते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें लड़कियों की शादी करना ही लड़कियों को 'गलत राह' पर जाने से बचाने का सबसे आसान और सुरक्षित उपाय लगता है। नेहा के मुताबिक मां-बाप को काफी समझाने और लड़कियों की क्षमता बताने के बाद उन्हें उनकी शादी रुकवाने में सफलता मिल जाती है।
नेहा ने बताया कि लड़कियों की शादियां रोकने के बाद उनका असली चैलेंज सामने आता है। लड़कियों को सशक्त किये बिना उनका लक्ष्य अधूरा रह जाता है। उनकी कोशिश होती है कि वे उन लड़कियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएं। इससे उनके परिवार को लड़की की अहमियत समझ में आने लगती है और विरोध कमजोर पड़ जाता है। इसके लिए वे छात्राओं-महिलाओं को लोन दिलवाकर उन्हें खुद का कोई काम करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि उन्हें ऐसे ज्यादातर मामलों में सफलता मिल जाती है। नेहा ने बताया कि यह 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' मिशन में मेरी अपने तरीके की सेवा है।