दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने का कानून बनाने के लिए सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में विधेयक पेश किया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कालोनियों में निवासियों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विधेयक, 2019 पेश करते हुए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, बिल में 1797 कालोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव है। ये कालोनियां 175 वर्ग किलोमीटर में फैली हैं।
केंद्रीय कैबिनेट ने 20 नवंबर को इस बिल को मंजूरी दे दी थी। इस विधेयक का उद्देश्य जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत, बेचने, खरीदने और कब्जे संबंधी दस्तावेजों को मान्यता देना है। इसके तहत इनके निवासियों को एक बार में इन सभी मामलों में छूट मिलेगी। इसके अलावा बिल अंतिम लेनदेन पर पंजीकरण शुल्क और स्टांप शुल्क की भी सुविधा देगा और सर्किल रेट से कम शुल्क के कारण आयकर देनदारी के मुद्दे को भी संबोधित करेगा। इससे पहले दिल्ली सरकार ने जुलाई में 1,797 कालोनियों को नियमित करने के लिए प्रस्तावित मापदंड जारी किये थे जिसमें मामूली जुर्माने के अलावा इन कॉलोनियों के निवासियों से 200 वर्ग मीटर भूखंड के लिए भूमि की सर्किल रेट का एक फीसदी शुल्क वसूलने की बात थी।
मालिकाना हक के लिए यह कीमत चुकानी होगी
विधेयक के तहत कालोनी के मालिकाना हक के लिए आवेदक को कार्पेट एरिया/भूखंड के आकार के हिसाब से मामूली शुल्क का भुगतान करना होगा। इसमें सरकारी भूमि पर बनी कालोनियों के लिए 100 वर्ग मीटर से कम के लिए सर्किल रेट का 0.5 फीसदी शुल्क वसूला जाएगा। वहीं 100-250 वर्ग मीटर के लिए एक फीसदी और 250 वर्गमीटर से अधिक के लिए 2.5 फीसदी शुल्क चुकाना होगा। वहीं निजी भूमि पर बनी कालोनियों के लिए यह शुल्क सरकारी भूमि का ठीक आधा हो जाएगा।