37 साल पुराने एक मामले का निपटारा न कर पाने के लिए दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सीबीआई को फटकार लगाई है। सीबीआई को इस मामले का निपटान सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैदी नहीं दिखाने पर अदालत ने कहा, ‘मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त’। माना जा रहा है कि यह देश में सबसे पुराना केस है, जिसकी अभी तक जांच हो रही है।
मामला 1981 में इलाहाबाद के तक्षकेश्वर महादेव मंदिर से एक प्राचीन मूर्ति चोरी होने का है। आरोप है कि ये मूर्ति तस्करी के माध्यम से न्यूयॉर्क भेजी गई। अदालत ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि यह मामला सीबीआई ने दायर किया था लेकिन उसने मुस्तैदी नहीं दिखाई। उसे पता होनी चाहिए कि पुराने मामले जितनी जल्दी हों निपटाए जाते हैं। ऐसे में ‘मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त वाली’ कहावत इस पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
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सीबीआई ने इस मामले से जुड़े एक वकील को उसकी जगह दूसरे वकील की नियुक्ति किए बगैर अदालत से स्थानांतरित कर दिया था। सीबीआई के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने न सिर्फ एजेंसी को फटकार लगाई, बल्कि इस आपराधिक मामले में देरी करने पर अभियोजन के निदेशक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने कहा कि वकील को उस समय स्थानांतरित किया गया जब उन्होंने मामले से जुड़े सारे तथ्यों का अध्ययन कर लिया था। स्थानांतरण की कोई भी सूचना अदालत को नहीं दी गई। अदालत ने इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के लिए अपना आदेश गृह सचिव और सीबीआई के निदेशक को भी भेजा है।