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दिल्ली दंगा मामला: देवंगना कलीता को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, दस्तावेज देखने की इजाजत पर क्यों लगी रोक?

Mon, 20 Jul 2026 03:29 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Delhi Riots Case: दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी देवंगना कलीता को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें कुछ दस्तावेज देखने की अनुमति मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की याचिका पर यह फैसला सुनाया। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर अदालत ने यह रोक क्यों लगाई? इस मामले पर क्या सुनवाई हुई? साथ ही ये भी जानेंगे कि आदालत ने मामले पर और क्या कुछ कहा...
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सुप्रीम कोर्ट ने मानी दिल्ली पुलिस की दलील - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली के वर्ष 2020 के दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश दिया। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें आरोपी देवांगना कलीता को उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई थी, जिन पर अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों के समर्थन में भरोसा नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की याचिका पर देवांगना कलीता को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।
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दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि आरोप तय होने से पहले किसी आरोपी को ऐसे दस्तावेज देखने का अधिकार नहीं है, जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा ही नहीं किया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान ट्रायल में हो रही देरी पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इसी तरह बहस चलती रही तो दस साल में भी दलीलें पूरी नहीं होंगी और फिर मुकदमे में देरी की शिकायत की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में आगे की सुनवाई तय की।

हाईकोर्ट ने पहले क्या राहत दी थी?

दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच जून को अपना अंतरिम आदेश हटाते हुए ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने पर अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दे दी थी। इसी फैसले में अदालत ने देवांगना कलीता की एक अलग याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने की इजाजत दी थी, जिनका इस्तेमाल अभियोजन पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में नहीं कर रहा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, चाहे मामला आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए से जुड़ा ही क्यों न हो।

देवांगना कलीता ने किन दस्तावेजों की मांग की थी?

देवांगना कलीता ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों से वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई थी। उनका दावा था कि उन वीडियो से यह साबित होगा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं। इसके अलावा उन्होंने एक व्हाट्सऐप समूह की पूरी चैट भी मांगी थी। उनका आरोप था कि उनके खिलाफ केवल चुनिंदा संदेशों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि पूरी बातचीत सामने आने से सच्चाई स्पष्ट हो सकती है।

दिल्ली पुलिस और हाईकोर्ट की क्या दलील रही?

दिल्ली पुलिस का कहना था कि आरोपपत्र में जिन सबूतों का सहारा लिया गया है, वे सभी पहले ही देवांगना कलीता को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसमें उनके मामले से जुड़े दंगों के वीडियो भी शामिल हैं। पुलिस का यह भी कहना था कि जिन व्हाट्सऐप समूहों या पुलिस अधिकारियों के संचार रिकॉर्ड का अभियोजन पक्ष इस्तेमाल नहीं कर रहा, उनमें संवेदनशील और विशेषाधिकार प्राप्त जानकारी हो सकती है। इसलिए उन्हें साझा नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने भी माना था कि पुलिस अधिकारियों के ऐसे व्हाट्सऐप चैट उपलब्ध कराना जरूरी नहीं है, लेकिन जिन अन्य दस्तावेजों का उपयोग अभियोजन नहीं कर रहा, उनकी सूची और निरीक्षण का अधिकार आरोपी को दिया जा सकता है।

सीसीटीवी फुटेज और ट्रायल को लेकर क्या कहा गया?

कुछ सीसीटीवी फुटेज को लेकर अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा था कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कुछ आरोपी अब भी फरार हैं। ऐसे में सभी फुटेज उपलब्ध कराना जांच को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और आरोपी को गैर-भरोसे वाले साक्ष्यों का निरीक्षण करने की सुविधा दी जानी चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि देवांगना कलीता निरीक्षण की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा न करें, क्योंकि इससे मुकदमे में और देरी होगी, जो न अभियोजन के हित में है और न ही आरोपी के।

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या मतलब?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा दी गई निरीक्षण की अनुमति प्रभावी नहीं रहेगी। अब यह तय होगा कि आरोप तय होने से पहले किसी आरोपी को अभियोजन की ओर से इस्तेमाल नहीं किए गए दस्तावेज देखने का अधिकार है या नहीं। इस कानूनी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट आगे विस्तृत सुनवाई करेगा। फिलहाल मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगने से ट्रायल की आगे की प्रक्रिया पर भी इस फैसले का असर पड़ेगा।

क्या है दिल्ली दंगा मामला?

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के आरोपों का है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में छात्र कार्यकर्ता देवांगना कलीता, नताशा नरवाल, उमर खालिद, शरजील इमाम, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की सदस्य सफूरा जरगर, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। सभी पर विभिन्न धाराओं के साथ यूएपीए के तहत भी कार्रवाई की गई है।
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