दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को लेकर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ा है है। सीपीआई (एम) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने चुनाव में हार पर कहा कि अगर विपक्षी गठबंधन इंडिया में पनपे मतभेदों ने भाजपा की जीत सुनिश्चित की। सीपीआई (एम) और आईयूएमएल दोनों विपक्षी गठबंधन इंडिया का हिस्सा हैं।
मार्क्सवादी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने भाजपा की जीत में मदद की। वहीं आईयूएमएल ने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ते तो वे भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकते थे।
सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और सत्तारूढ़ एलडीएफ के संयोजक टीपी रामाकृष्णन ने कहा कि कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के लिए अच्छा सहयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरफ से अच्छा सहयोग नहीं मिला। अगर पार्टी पहल करती तो इंडिया गठबंधन बेहतर काम कर सकता था। लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
उन्होंने कहा कि वामपंथी दल दिल्ली जैसे राज्यों में कमजोर हैं। अगर वहां कोई मजबूत है तो वह कांग्रेस है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गठबंधन को एकजुट करने में कोई सहयोग नहीं किया। उन्होंने भाजपा को सत्ता में आने में मदद करने वाला रुख अपनाया।
सहयोगी एकजुट होते तो शायद ऐसा न होता
आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता पीके कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि अगर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एकजुट होते तो शायद ऐसा न होता। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास किसी भी राज्य में सत्ता में आने के लिए मजबूत वोट आधार नहीं है। वह धर्म निरपेक्ष दलों के बीच मतभेद पैदा करके जीवित रहते हैं। इंडिया गठबंधन में मतभेदों के चलते भगवा पार्टी को दिल्ली चुनाव में मदद मिली। अगर गठबंधन के दल एकजुट होते तो परिणाम काफी अलग होते।
उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों के लिए किसी एक पार्टी को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। गठबंधन में हर किसी को इस पर चर्चा करनी चाहिए और चुनाव परिणामों का मूल्यांकन करना चाहिए। ताकि भविष्य में ऐसी चीजें न हों। उन्होंने यह भी कहा कि हर राज्य में परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इंडिया गठबंधन को संविधान की रक्षा करने के लिए मतभेदों को दूर करने पर काम करना चाहिए।
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