दरअसल, माना यही जा रहा है कि शराब घोटाले और 'शीश महल' विवाद के बाद आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की छवि बहुत खराब हो गई है। चुनावों में उसे इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरों कैलाश गहलोत और राजकुमार आनंद जैसे लोगों के पार्टी छोड़ने से भी आम आदमी पार्टी को नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके बाद से ही अरविंद केजरीवाल एक बार फिर आम आदमी पार्टी की छवि सुधारने के काम में जुट गए हैं। वे लगातार दूसरी पार्टियों-संगठनों से बड़े चेहरों को लाकर अपनी पार्टी का मनोबल ऊंचा बनाए रखने का काम कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस और भाजपा के कई बड़े चेहरों को तोड़ा है और उन्हें अपने पक्ष में लाने में कामयाबी हासिल की है।
लेकिन अवध ओझा की एक अलग छवि है। वे साफ-सुथरे शिक्षक के तौर पर देखे जाते हैं। उनकी अपनी एक अलग फैन-फॉलोइंग है। पूर्वांचल का चेहरा होने के कारण भी अवध ओझा आम आदमी पार्टी की राजनीति को सूट करते हैं। केजरीवाल उन्हें किसी पूर्वांचली बहुल इलाके से चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। आम आदमी पार्टी को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
बड़े चेहरे छोड़ चुके साथ
लेकिन अरविंद केजरीवाल के पास इसके पहले भी बड़े-बड़े नाम हुआ करते थे। लेकिन एक-एक करके उन सभी लोगों ने केजरीवाल का साथ छोड़ दिया। ऐसे लोगों में प्रशांत भूषण, शांति भूषण, योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार, मेधा पाटकर, कुमार विश्वास और आशुतोष जैसे लोग शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद केजरीवाल की जिद की राजनीति के चलते सभी ने उनसे एक-एक कर किनारा कर लिया। ऐसे में अवध ओझा, जो अपनी हनक के लिए जाने जाते हैं, अरविंद केजरीवाल के साथ कितने दिन टिकेंगे, कहा नहीं जा सकता।
अवध ओझा ने क्या कहा?
आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने के अवसर पर अवध ओझा ने कहा कि आज वे अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा उनका पहला प्यार है और वे इसके लिए काम करते रहेंगे। राजनीति में आकर भी वे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर करने का प्रयास करेंगे।
केजरीवाल ने कहा कि वे शिक्षक हैं और आम आदमी पार्टी से जुड़कर शिक्षा के काम को आगे बढ़ाएंगे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि अवध ओझा के आने से आम आदमी पार्टी की शिक्षा की क्रांति और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। इससे लगता है कि आम आदमी पार्टी अवध ओझा का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश करेगी।