दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि हमें नए समय की चुनौतियों के लिहाज से शहरों के विकास को नए तरीके से परिभाषित करना चाहिए। हमें समझने की जरूरत है कि विकास का अर्थ प्रकृति के साथ विकास करना ही हो सकता है। प्राकृतिक संसाधनों से अनुचित छेड़छाड़ विकास के पीछे विनाश को भी आमंत्रित करती है। इसलिए शहरों के विकास को सस्टेनेबल (सतत) भी होना चाहिए।
बुधवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जैन ने कहा कि शहरों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए स्मार्ट बनना होगा। इससे आने वाली चुनौतियों से शहर के लोगों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। लेकिन स्मार्ट बनने की इस कोशिश में पर्यावरण की चिंताओं को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास को स्मार्ट होने के साथ-साथ सतत भी होना चाहिए।
शहरों में आवास की गंभीर होती समस्या को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने कम जगह घेरने वाली ऊंची इमारतों की वकालत की। उन्होंने कहा कि भूमि की एक सीमा है और उसे ज्यादा फैलाया नहीं जा सकता। लेकिन अगर आधुनिकतम तकनीकी से हम ऊंची, लेकिन सुरक्षित तकनीकी से युक्त आवास बना सकें तो शहरी आबादी की आवास की समस्या को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कई जगहों पर ऊंची इमारतों का निर्माण कराने की योजना पर काम कर रही है। आने वाले समय में इन जगहों पर लोगों को बसाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत में शहरों के मास्टर प्लान बनाते समय काफी कड़े मापदंड बनाए जाते हैं जिनका सामान्य स्थितियों में पालन करना संभव नहीं रह जाता है। अगर इन्हें लचीला बनाया जाए तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में हमें अपने नियम-कानूनों में भी उचित बदलाव करने की आवश्यकता है।