दिल्ली में 10 अक्तूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं पर रोक लगाने को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के आरोप वाली याचिका पर डीएमआरसी ने कहा कि मेट्रो ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था और न ही ट्रेनों के संचालन में कटौती की गई। निगम के अनुसार, कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और बाहर निकलने पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाए गए थे। डीएमआरसी ने अदालत को बताया कि 10 अक्तूबर को 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 फेरे लगाए थे। उसने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाई गई थी।
डीएमआरसी ने अवमानना याचिका पर क्या जवाब दिया?
- डीएमआरसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद करने का फैसला नहीं लिया गया था। निगम के अनुसार, मेट्रो ट्रेनें सामान्य रूप से चलती रहीं और किसी भी ट्रेन सेवा को रद्द नहीं किया गया। विवाद स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर था।
- डीएमआरसी ने कहा कि ये प्रतिबंध कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के आकलन और निर्देशों के आधार पर लगाए गए थे। निगम ने अदालत के 9 अक्तूबर के आदेश के अनुपालन में यह जवाब दाखिल किया। यह मामला 10 अक्तूबर के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों के संचालन पर रोक लगाए जाने के आरोपों से जुड़ा है।
आठ अक्तूबर को कितने मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाया गया था?
डीएमआरसी के जवाब के मुताबिक, आठ अक्तूबर को पुलिस के निर्देश पर 303 में से 57 मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था। हालांकि, इन प्रतिबंधों के बावजूद मेट्रो ट्रेनों का संचालन जारी रहा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्तूबर को आदेश दिया कि दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगनी चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सार्वजनिक परिवहन सेवाएं पूरी तरह बाधित न हों। इसके साथ ही डीएमआरसी और संबंधित पक्षों से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कितने स्टेशन चालू रहे?
डीएमआरसी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या 57 से घटाकर 45 कर दी गई। कुल 303 स्टेशनों में से 258 स्टेशन यात्रियों के लिए पूरी तरह चालू और सुलभ रहे। यानी करीब 85 प्रतिशत मेट्रो नेटवर्क पर यात्रियों की आवाजाही जारी रही। केवल 15 प्रतिशत स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था। डीएमआरसी के अनुसार, कई प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों को मेट्रो बदलने की सुविधा भी मिलती रही। निगम ने इन आंकड़ों के आधार पर कहा कि मेट्रो नेटवर्क को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था।
प्रदर्शन वाले दिन कितनी ट्रेनें चलीं और कितने यात्रियों ने सफर किया?
डीएमआरसी के अनुसार, 10 अक्तूबर को 271 मेट्रो ट्रेनों ने कुल 4,157 फेरे लगाए। निगम ने ट्रेन सेवाओं में किसी तरह की कटौती या रद्दीकरण से इनकार किया। हालांकि, उस दिन मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या सामान्य से कम रही। डीएमआरसी ने अदालत को बताया कि 10 अक्तूबर को करीब 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि सामान्य दूसरे शनिवार को यह संख्या लगभग 58 लाख रहती है। इस तरह उस दिन यात्रियों की संख्या सामान्य आंकड़े से काफी कम थी। हालांकि, हलफनामे में यात्रियों की संख्या घटने के कारणों का अलग से विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।