आम आदमी पार्टी की शुक्रवार को हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक के बाद पार्टी ने घोषणा की है कि मनीष सिसोदिया पंजाब के प्रभारी और सत्येंद्र जैन सह प्रभारी होंगे। ये दोनों ही नेता अरविंद केजरीवाल के दिल्ली मॉडल के चेहरे थे। मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में शिक्षा मॉडल को आगे बढ़ाया था तो सत्येंद्र जैन ने राजधानी की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार कर दावा किया था। आम आदमी पार्टी की पूरी राजनीति जिन दो मुद्दों पर केंद्रित रही, उनमें शिक्षा और स्वास्थ्य ही थे। जिस तरह से केजरीवाल को राजनीतिक सफलताएं मिली थीं, कहा जा सकता है कि उनकी यह रणनीति कारगर भी रही और आम आदमी पार्टी को इसका लाभ मिला।
अब इन्हीं दोनों नेताओं को पंजाब की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब में भी वह इन्हीं मुद्दों पर फोकस करेगी और इसी के सहारे चुनाव में जाएगी। क्या सिसोदिया और सत्येंद्र जैन अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की छवि बदल सकेंगे? क्या ये ऐसा काम कर सकेंगे कि आम आदमी पार्टी पंजाब में एक बार फिर चुनाव जीत सके? भाजपा ने इन नेताओं की नियुक्तियों को 'दिल्ली का भ्रष्ट मॉडल पंजाब में भी लागू करने की कोशिश' बताया है।
चर्चा यही है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद केजरीवाल का पूरा ध्यान पंजाब पर है। पंजाब में सरकार ने अचानक नशे के विरुद्ध अभियान छेड़ दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान के सहारे होने वाला नशे का कारोबार पंजाब में खूब फलफूल रहा था। लेकिन इससे पंजाब की युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही थी। बाद में यह बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता था। इसे देखते हुए ही पंजाब सरकार ने अचानक नशे के विरुद्ध कड़ा अभियान छेड़ दिया और उन्हें इसमें सफलता भी मिली।
इसी तरह पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। पंजाब में हुई अपराध की कई बड़ी वारदातों ने पूरे देश का ध्यान पंजाब की ओर खींचा था। बड़े-बड़े लोगों की हत्याओं का सिलसिला अमृतसर के धार्मिक स्थल तक पहुंच गया था जहां पंजाब के एक बड़े राजनेता के ऊपर भी हमला हो गया। इससे आम आदमी पार्टी सरकार की सुरक्षा को लेकर किरकिरी हो रही थी। लेकिन अब पंजाब पुलिस ने इस मोर्चे पर भी सख्ती दिखाई है और ताबड़तोड़ एनकाउंटर कर अपराध पर नियंत्रण करने की कोशिश की है। इससे भी केजरीवाल ने पंजाब में सरकार की छवि सुधारने का काम किया है।
माना जा सकता है कि यदि दोनों नेता पंजाब में कुछ जमीनी बदलाव कर सके तो इससे उनके पास यह कहने का अवसर होगा कि जहां केंद्र सरकार का दखल नहीं था, वहां वे बेहतर करके दिखाने में सफल रहे। यह मुद्दा उनकी साख बेहतर करने में मदद कर सकता है। पंजाब के सरकारी स्कूल के अध्यापकों को जिस तरह दिल्ली की तर्ज पर विदेशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने का काम शुरू हुआ है, और मोहल्ला क्लीनिकों को खोलने की शुरुआत हुई है, उससे लगता है कि आम आदमी पार्टी ने इस नुस्खे पर काम करना शुरू भी कर दिया है।
सामने आ सकती है ये चुनौती
आम आदमी पार्टी की समस्या यह हो सकती है कि वह जिन चेहरों के साथ पंजाब में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, वे दिल्ली में पहले ही भ्रष्टाचार के मामले में निशाने पर हैं। ऐसे में वे पंजाब में भी भाजपा और कांग्रेस के निशाने पर रह सकते हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े चेहरे और अरविंद केजरीवाल के सबसे खास सहयोगी यही नेता रहे हैं। ऐसे में माना यही जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है।
भाजपा ने बोला हमला
भाजपा प्रवक्ता शुभेंदु शेखर अवस्थी ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में हर मॉडल के सहारे भ्रष्टाचार करने का काम किया था। सच्चाई यह थी कि अरविंद केजरीवाल का शिक्षा और स्वास्थ्य का मॉडल भी भ्रष्टाचार करने का ही मॉडल था। उनकी सरकार जाने के बाद भी आज तक विभिन्न मामलों में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर केस दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने अपने इन्हीं भ्रष्ट नेताओं को पंजाब में लगाया है जिससे वे भ्रष्टाचार कर अरविंद केजरीवाली की झोली भर सकें। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी केजरीवाल का मॉडल बुरी तरह फेल होगा।