बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा देने वाली मोदी सरकार बेटियों महिलाओं को सुरक्षित नहीं कर पाई है। महिलाओं के प्रति अपराध की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। महिलाओं के साथ अपराध इस दरिंदगी तक बढ़ चुके हैं कि इंसानियत को शर्मसार करने लगे हैं। महिलाएं देश में इतनी असुरक्षित हैं कि भारत ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान पीछे छोड़ दिया है।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक शर्मसार करने वाला वीडियो सामने आया जहां एक महिला के साथ तीन तीन लोग जबरदस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में महिला के साथ जो किया जा रहा है वह देश की पहली घटना नहीं है इससे पहले बिहार से भी ऐसी दंरिंदगी का वीडियो सामने आ चुका है। जिसमें बच्ची के साथ कुछ लोग जबरदस्ती कर रहे हैं और वह भैया- भैया जाने दो कर जान और इज्जत की भीख मांग रही है। मध्य प्रदेश के मंदसौर से देश को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई जहां आठ साल की बच्ची के साथ वहशियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी। इससे पहले कठुआ और उन्नाव गैंग रेप की घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया था।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया में कैंपेन चलाए जा रहे हैं, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सियासत में भी घमासान मचा हुआ है। वहशी दरिंदों को मौत की सजा देने की मांग उठ रही है। बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कड़े कानून बना दिए गए हैं। लेकिन जितने कड़े कानून बने हैं उससे कहीं ज्यादा महिलाओं के प्रति अपराध की संख्याएं बढ़ गई हैं। रेप के बढ़े आंकड़े कानून का माखौल उड़ा रहे हैं।
दिल्ली की दिल दहला देने वाली 2012 के चर्चित निर्भया गैंगरेप के बाद जिस तरह से देश एकजुट हुआ था लगा था अब देश में महिलाओं की स्थिति सुधरेगी, छेड़छाड़ कम होगी और बलात्कार के मामले तो मानों अब होंगे ही नहीं लेकिन...मंदसौर, सतना, बिहार और उन्नाव में जिस तरह से महिलाओं बच्चियों को दरिंदो ने रौंदा है। ऐसा लगता है कानून का डर वहशियों को बिलकुल भी नहीं है। निर्भया कांड के बाद सरकार ने नया एंटी रेप लॉ बनाया। इसके लिए आईपीसी और सीआरपीसी में तमाम बदलाव किए गए, और इसके तहत सख्त कानून बनाए गए। साथ ही रेप को लेकर कई नए कानूनी प्रावधान भी शामिल किए गए। लेकिन इतनी सख्ती और इतने आक्रोश के बावजूद रेप के मामले नहीं रुके।
'रेप कैपिटल' कही जाने लगी दिल्ली
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि देश की राजधानी दिल्ली में साल 2011 से 2016 के बीच महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में 277 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में साल 2011 में जहां रेप के 572 मामले दर्ज किये गए थे, साल 2016 में यह आंकड़ा 2155 तक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में दुष्कर्म के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह 132 फीसदी तक बढ़ गया है। दिल्ली से दुष्कर्म के आने वाले आंकड़ें चौंका रहे हैं। साल 2017 में अकेले जनवरी महीने में ही दुष्कर्म के 140 मामले दर्ज किए गए थे। मई 2017 तक दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 836 मामले दर्ज किए गए थे।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बलात्कार के मामले 2015 की तुलना में 2016 में 12.4 फीसदी बढ़े हैं। 2016 में 38,947 बलात्कार के मामले देश में दर्ज हुए। मध्य प्रदेश इनमें अव्वल है, क्योंकि बलात्कार के सबसे ज्यादा - 4,882 मामले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए। इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश आता है, जहां 4,816 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। जबकि महाराष्ट्र 4,189 दर्ज मामलों के साथ तीसरे नंबर पर रहा।
यूपी के पिछले तीन सालों के आंकड़े बता रहे हैं कि यहां औसतन हर दिन 8 महिलाओं का बलात्कार होता है जबकि 30 अपहरण किए जाते हैं। जबकि महिलाओं से अपराध के मामले में 100 एफआईआर दर्ज की जाती है। कानून व्यवस्था से जुड़े एक अधिकारी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध 24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। महज तीन महीनों का उत्तर प्रदेश का आंकड़ा देखें तो जनवरी से मार्च तक 2016 में जहां 751 बलात्कार हुए थे वहीं 2017 में 873 जबकि 2018 में 899 मामले दर्ज किए गए हैं।