दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोले जाने संबंधी केंद्र सरकार का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया था। न्यायालय ने कहा ऐसा कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने और लोगों को भूख से बचाने के प्रयास में संतुलन कायम करने के लिए किया गया था।
अदालत ने कानून के एक छात्र की जनहित याचिका को खारिज करते हुए उस पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। इस छात्र ने केंद्र के 30 मई के आदेश को चुनौती थी। केंद्र ने आदेश दिया था कि निरूद्ध क्षेत्रों में लॉकडाउन को बढ़ाया जा रहा है और निरूद्ध क्षेत्रों के बाहर चरणबद्ध तरीके से गतिविधियों को फिर से खोला जाएगा।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एक पीठ ने कहा कि सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह स्थिति के प्रति सजग रहे और उसका बारीकी से मूल्यांकन करे और यदि यह पाया जाए कि संक्रमण की दर बढ़ रही है, तो वे हमेशा अपने निर्णय की समीक्षा कर सकते हैं और स्थिति के अनुसार अंकुश लगा सकते हैं।