दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित दिल्ली बार काउंसिल द्वारा किए गए दावे को सही ठहराया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 'दिल्ली बार काउंसिल द्वारा जज, कोर्ट स्टाफ और वकीलों सहित सभी न्यायिक कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने के लिए किए गए दावे में दम है, इसलिए वे भी बिना उम्र की सीमा और शारीरिक स्थिति की सीमाओं के बिना, प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 टीकाकरण प्राप्त कर सकते हैं।
इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, प्रमुख सचिव, दिल्ली सरकार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि टीकाकरण के दूसरे चरण में 45 साल से 59 साल तक के बीमार लोगों और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का टीकाकरण किया जा रहा है।
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बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी महीने की शुरुआत में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं एवं अन्य न्यायिक कर्मचारियों को कोविड-19 टीकाकरण के पहले चरण में शामिल करने के मुद्दे पर दायर याचिका पर केंद्र को कोई भी निर्देश देने से इंकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह एक नीतिगत निर्णय है और इस मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि टीकाकरण के लिए प्राथमिकता निर्धारित करना नीतिगत निर्णय है और कोविड-19 टीकाकरण के लिए सरकार की प्राथमिकता को बदलने का हमें कोई कारण नहीं दिखता।
इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को इस याचिका को बतौर ज्ञापन स्वीकार कर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इस पर विचार करने को कहा। अदालत ने कहा कि इस पर जल्द विचार किया जाना चाहिए।