दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पेप्सिको को ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ अपने पेय पदार्थों का उत्पादन जारी रखने की अनुमति देने से इनकार करने वाले आदेश में तत्काल हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। हालांकि, अदालत ने एकल न्यायाधीश से इस फैसले के पीछे के स्पष्ट कारण एक सप्ताह के भीतर दर्ज करने को कहा है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ पेप्सिको की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें छह अक्टूबर के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी। पीठ ने आदेश में विशिष्ट कारणों का जिक्र नहीं होने पर ध्यान दिया और कहा कि इन कारणों को दर्ज किया जाना जरूरी है, ताकि अपील पर विचार किया जा सके।
स्टिंग एनर्जी और एड्रेनालिन रश के उत्पादन पर विवाद
पेप्सिको की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कंपनी को अपने पेय पदार्थों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद एकल न्यायाधीश ने कंपनी को इस मामले में सख्त कार्रवाई से संरक्षण दिया और पहले से मौजूद स्टॉक बेचने की अनुमति भी दी।
हालांकि, कंपनी को ‘स्टिंग एनर्जी’ और ‘एड्रेनालिन रश’ नाम वाले पेय पदार्थों का ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ नया उत्पादन करने की अनुमति नहीं दी गई। कंपनी के वकील ने कहा कि एक अन्य मामले में इसी तरह की राहत दूसरे पेय पदार्थ को दी गई थी। पीठ ने कहा कि इस स्तर पर वह मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं करना चाहती, खासकर इसलिए क्योंकि अंतरिम राहत की पुष्टि से जुड़ी पेप्सिको की याचिका अभी एकल न्यायाधीश के समक्ष लंबित है। अदालत ने कहा, “इस मामले में फिलहाल अंतरिम राहत लागू है।”
एक सप्ताह में कारण दर्ज करने का निर्देश
खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया कहा कि एकल न्यायाधीश ने यह स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किए कि पेप्सिको को ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ उत्पादन जारी रखने की अनुमति क्यों नहीं दी गई, जबकि रेड बुल से जुड़े मामले में ऐसी अनुमति दी गई थी।
पीठ ने निर्देश दिया कि छह अक्टूबर के आदेश के पैराग्राफ 13 में दर्ज टिप्पणियों के संबंध में कारण स्पष्ट किए जाएं, ताकि खंडपीठ इस मुद्दे पर विचार कर सके। एकल न्यायाधीश को यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
एफएसएसएआई की ओर से पेश वकील ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है।
एफएसएसएआई ने लेबल हटाने का दिया था निर्देश
छह अक्टूबर को एकल न्यायाधीश ने एफएसएसएआई के उस निर्देश के बाद पेप्सिको के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया था, जिसमें कंपनी से अपने पेय पदार्थों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ का उल्लेख हटाने को कहा गया था। अदालत ने कंपनी को पहले से तैयार और ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल वाले पेय पदार्थों का मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दी थी। हालांकि, यह भी स्पष्ट कर दिया था कि कंपनी इस लेबल के साथ नए उत्पादों का निर्माण नहीं कर सकती।
पेप्सिको ने एफएसएसएआई के उन आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिनमें पेय पदार्थों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल हटाने का निर्देश दिया गया था। एफएसएसएआई ने देशभर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे उत्पाद जब्त करने के लिए भी कहा था।