भारत में सबसे तेज टीकाकरण अभियान के बावजूद एक बहुत बड़ी आबादी को टीका लगना बाकी है। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट में विदेशों में रहने और काम करने वाले एनआरआई और विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगवाने की मांग की गई है।
प्रवासी लीगल सेल की याचिका पर आज सुनवाई
याचिका में इस संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता प्रवासी लीगल सेल ने प्रतिवादियों को निर्देश जारी करने की भी मांग की है कि वे टीकाकरण प्रमाणपत्रों में पासपोर्ट नंबर शामिल करने का विकल्प प्रदान करें और उन लोगों के लिए पासपोर्ट नंबर के साथ पहले से जारी टीकाकरण प्रमाणपत्रों को अपडेट करें जो विदेश यात्रा करने का इरादा रखते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सांसद श्रीविग्नेश, रॉबिन राजू और दीपा जोसेफ ने प्रतिवादियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) में कोवाक्सिन को शामिल करने और कोविशील्ड वैक्सीन का पूरा नाम जोड़ने के लिए उचित कदम उठाने के लिए निर्देश देने की मांग की।
याचिका में कहा गया है कि चूंकि अधिकांश देश केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश करने दे रहे हैं जिन्होंने टीका लगा रखा है। ऐसे में विदेश में नौकरी करने वालों के लिए लौटना मुश्किल होगा। यही नहीं, टीके की दो खुराक लेने में वक्त लगता है ऐसे में नौकरी जाने की भी संभावना बन जाती है। जस्टिस डीएन पटेल और ज्योति सिंह की पीठ इस पर सोमवार को सुनवाई करेगी।