शादी के लिये ढाई लाख रुपये की नकदी आहरण की सीमा हटाने की मांग करने वाली याचिका बुधवार को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। याची ने इस रोक को हटाने का निर्देश सरकार को देने की मांग की थी।
मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शादी के लिए ढाई लाख रुपये आहरण की सीमा को मनमाना बताया गया था। सरकारी आदेश के मुताबिक, शादी के लिए नकदी निकालने वाले को उन सभी लोगों की जानकारी दी जानी है, जिन्हें नकद भुगतान किया जाना है। उन लोगों को शपथ पत्र देना होगा कि उनका बैंक खाता नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में 28 नवंबर को फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि सरकार ने नोटबंदी के मामले में जहां जरूरी है, वहां राहत दी है। याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के वकील ने कहा था कि इस मामले में सरकार पहले ही काफी राहत दे चुकी है लेकिन कुछ शर्तें लगाना जरूरी है ताकि लोग इसका दुरुपयोग न करें। एएसजी संजय जैन ने कहा कि अगर शर्तें नहीं होंगी तो कोई भी शादी का कार्ड छपवाकर बैंक से पैसे निकाल लेगा।