दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग को एक जनहित याचिका में उठाए गए राजनीतिक दलों के भीतर प्रतिनिधित्व के सवाल पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
याचिका में कोर्ट से राजनीतिक दलों के भीतर लोकतंत्र के मानदंड तय करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि पार्टियां संगठनात्मक चुनाव के प्रावधानों का पालन नहीं करती हैं।
जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील अभिमन्यु तिवारी की दलील सुनने के बाद निर्वाचन आयोग को जल्द से जल्द पार्टियों के भीतर प्रतिनिधित्व को लेकर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, प्रतिनिधित्व नियम व कानून के दायरे में होने चाहिए। याचिकाकर्ता सी राजशेखरन ने दलील दी कि देश की अधिकतर पार्टियों में कार्यप्रणाली सामंती है। इसके कारण पार्टी में एक अप्रभावी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ही पालन होने लगता है। ऐसे में निर्वाचन आयोग की ओर से तय आंतरिक चुनाव के नियम की अनदेखी होती है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से निर्वाचन आयोग को पार्टियों के भीतर चुनाव कराने के लिए आदर्श प्रक्रिया बनाने का निर्देश देने की मांग की है।