के. कविता
- फोटो : ANI
Delhi HC On Election Commission: तेलंगाना की राजनीति में अपनी नई जमीन तलाश रहीं पूर्व एमएलसी के. कविता को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दरअसल, हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को कविता की पार्टी के रजिस्ट्रेशन वाले आवेदन पर जल्द विचार करने को कहा है. के कविता जल्द ही 'तेलंगाना प्रजा जागृति' के साथ नई सियासी पारी का आगाज कर सकती हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने पंजीकरण की सभी तकनीकी खामियों को दूर कर लिया है, इसलिए अब आयोग को इस पर कानून सम्मत निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कोई डेडलाइन देने से इनकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) से अलग होने के बाद के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया था। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग में अपनी पार्टी 'तेलंगाना प्रजा जागृति' के पंजीकरण के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने इसमें कई कमियां बताते हुए सुधार के लिए कहा था. इसके बाद कविता के वकीलों ने अदालत को सूचित किया कि 23 फरवरी को बताई गई सभी खामियों को अब पूरी तरह दुरुस्त कर दिया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत में के कविता के वकील ने दलील दी कि तेलंगाना में अप्रैल के मध्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी का पंजीकरण समय पर होना बेहद जरूरी है। समय से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से उम्मीदवारों को उतारने में परेशनी हो रही है. दूसरी ओर, चुनाव आयोग के वकील संजय वशिष्ठ ने कहा कि आयोग इस वक्त देशभर में चुनावी प्रक्रियाओं में व्यस्त है, लेकिन वह जल्द ही इस पर निर्णय लेगा।
यह भी पढ़ें: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा: भविष्य के युद्धों में ड्रोन अहम, भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा
बीआरएस से बगावत और नई पार्टी का सफर
हाल के वर्षों में के कविता अपनी पुरानी पार्टी बीआरएस और अपने पिता के चंद्रशेखर राव से अलग हो गईं. के कविता को अपने ही चचेरे भाइयों टी. हरीश राव और जे. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगाने के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.
कविता ने आरोप लगाया था कि इन नेताओं ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर उनके पिता की छवि खराब की है। इसके तुरंत बाद कविता ने बीआरएस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने घोषणा की कि वह अपनी खुद की पार्टी के साथ तेलंगाना की जनता के बीच जाएंगी। पिछले कुछ महीनों से वे अपने पुराने सांस्कृतिक संगठन 'तेलंगाना जागृति' के जरिए जनमुद्दों पर सक्रिय रही हैं.