अदालत ने सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के दायरे से बाहर न रखने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कहा कि जब बिंदी, सिंदूर व काजल को जीएसटी से बाहर रखा जा सकता है, तो सैनिटरी नैपकिन को क्यों नहीं। कोर्ट ने कहा कि सरकार आंकड़ों से खेल रही है। जेएनयू में पीएचडी की छात्रा जरमीना इसरार खान ने याचिका दायर कर सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी कर लगाने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में इसे गैर कानूनी बताया गया है।
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याचिका की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सैनिटरी नैपकिन एक बेहद जरूरी उत्पाद है। उस पर कर लगाने का कोई मतलब नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
अदालत ने 31 सदस्यीय जीएसटी काउंसिल में एक भी महिला सदस्य न रखे जाने पर नाराजगी जताई। साथ ही पूछा कि नैपकिन पर जीएसटी के मामले में महिला व बाल विकास मंत्रालय से मशविरा किया गया था या केवल आयात-निर्यात के आंकड़ों के आधार पर ही फैसला कर दिया।