दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पड़ोसी राज्यों में स्थित 10 ताप बिजली संयंत्रों को बंद करने की मांग की है। सरकार का आरोप है कि ये थर्मल पॉवर प्लांट्स पुरानी तकनीक से काम कर रहे हैं। अपनी उपयोगिता की तुलना में बहुत ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं। इससे राजधानी के लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।
सरकार ने उम्मीद जाहिर की है कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय इस पर शीघ्र निर्णय लेगा। दिल्ली सरकार ने इस कदम को उठाने के लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग का अनुरोध किया है। आरोप है कि अभी तक केंद्र ने इसके बाबत कोई विचार नहीं किया है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने राजधानी का प्रदूषण घटाने के लिए कई अहम उपाय किए हैं। इनका असर भी दिखाई पड़ रहा है और राजधानी के प्रदूषण में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि यह कमी अभी संतोषजनक नहीं है क्योंकि अक्टूबर-नवंबर में प्रदूषण की स्थिति अत्यंत खराब हो जाती है। इसे रोकने के लिए इन थर्मल प्लांट्स को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि ये बहुत ज्यादा प्रदूषण कर रहे हैं।
इन 10 संयंत्रों को बंद करने की मांग
यह याचिका पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोयले से चलने वाले 10 ताप बिजली घरों के संबंध में दायर की गई है। ये 10 थर्मल पावर प्लांट दादरी एनसीटीपीपी (यूपी), हरदुआगंज टीपीएस (यूपी), जीएच टीपीएस (लेहरा मोहब्बत) (पंजाब), नाभा टीपीपी (पंजाब), रोपड़ टीपीएस (पंजाब), तलवंडी साबो टीपीपी (पंजाब), यमुनानगर टीपीएस (हरियाणा), इंदिरा गांधी एसटीपीपी (हरियाणा), पानीपत टीपीएस (हरियाणा) और राजीव गांधी टीपीएस (हरियाणा) हैं। दिल्ली सरकार का आरोप है कि इन संयंत्रों के कारण राजधानी तक प्रदूषण पहुंच रहा है। इसलिए इन संयंत्रों को बंद किया जाना चाहिए।