दिल्ली को छत्तीसगढ़ से ऑक्सीजन मिलनी शुरू हो गई है और मंगलवार को ही 70 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन दिल्ली पहुंच चुकी है। हिमाचल प्रदेश से भी इसी हफ्ते ऑक्सीजन मिलनी शुरू हो जाएगी। उम्मीद है कि एक हफ्ते के अंदर दिल्ली की सांसों पर मंडराता ऑक्सीजन का संकट हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
दिल्ली सरकार ने एक बैठक कर अगले एक महीने के अंदर 44 ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने का निर्णय किया है। इनमें आठ ऑक्सीजन प्लांट केंद्र सरकार के द्वारा लगाये जाएंगे। इन प्लांट्स का काम पहले से ही चालू है और उम्मीद है कि ये अगले तीन से चार दिनों के अंदर काम करना शुरू कर देंगे। इनके काम शुरू करते ही दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी की काफी हद तक आपूर्ति हो जायेगी।
फ्रांस की मशीनों से बड़ी उम्मीद
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया है कि सरकार फ्रांस से 21 ऑक्सीजन प्लांट मंगा रही है। ये सभी प्लांट्स ‘रेडी टू यूज़’ होंगे यानी आने के एक हफ्ते के अंदर इनसे ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर दिया जायेगा। दिल्ली सरकार ने इन मशीनों को मंगवाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले दो हफ्ते के अंदर फ्रांस से ये मशीनें दिल्ली आ जायेंगी और इसके अगले एक हफ्ते में इनसे ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू हो जाएगा। यानी 15-20 मई के आसपास दिल्ली के पास अपनी आवश्यकता की ऑक्सीजन का उत्पादन होने लगेगा और दिल्ली की सांसों पर उठा संकट हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
थाईलैंड से भी सरकार ने 18 ऑक्सीजन टैंकर मंगवाने का निर्णय किया है। इन टैंकर्स के आने से ऑक्सीजन की सप्लाई को सुनिश्चित किया जायेगा। सरकार पड़ोसी राज्यों से ऑक्सीजन की अपनी निर्भरता कम करना चाहती है और इसी दृष्टि में राजधानी के अपने ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने की कोशिश की जा रही है।
कितनी ऑक्सीजन की जरूरत
दिल्ली सरकार ने कहा है कि ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए अब दिल्ली में रोजाना 700 टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। लेकिन इस मांग की तुलना में उसे केवल 335 टन ऑक्सीजन ही मिल पा रही है। दिल्ली की मांग के बाद उसका कोटा बढ़ाकर 490 टन कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी मांग और आपूर्ति का अंतर बना हुआ है। सरकार इस कमी को अपने उत्पादन के जरिये पूरा करना चाहती है।