भाजपा विधायक दल की बैठक का दृश्य।
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रेखा गुप्ता की दमदार बैटिंग
रविवार को भाजपा के विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने मजबूत इरादों को जाहिर कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक रोकी गई सभी कैग रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखेगी। इससे जनता को यह जानने को मिलेगा कि पिछली सरकार ने जनता के हितों के साथ किन-किन मुद्दों पर समझौता करने का काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कर्ता-धर्ता लोगों को भ्रष्टाचार के रूप में ली गई जनता की गाढ़ी कमाई वापस करनी पड़ेगी। रेखा गुप्ता के तेवर बता रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने वाली नहीं हैं।
उनके ऊपर आरएसएस-भाजपा के वैचारिक मॉडल की सत्ता की धमक को पूरी मजबूती से स्थापित करने की भी है। दिल्ली की प्रदेश स्तर की राजनीति की आवाज किसी भी दूसरे प्रदेश की तुलना में अधिक सुनी जाती है। ऐसे में दिल्ली में राजनीति की एक बड़ी 'रेखा' खींचकर भाजपा उसे दूसरे राज्यों में भुनाने की कोशिश अवश्य करेगी। रेखा गुप्ता के लिए यह चुनौती किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगी।
रेखा गुप्ता सरकार के इन्हीं आक्रामक तेवरों के बीच आतिशी को आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का बचाव करने की चुनौती होगी। आम आदमी की आगे की राजनीति कितना आगे बढ़ेगी, यहां तक की आने वाले समय में अरविंद केजरीवाल और खुद पार्टी का भविष्य क्या होगा, बहुत हद तक यह आतिशी की इस नई पारी पर निर्भर करेगा। अभी से यह आशंका जताई जाने लगी है कि देर-सबेर आम आदमी पार्टी के कुछ विधायक पार्टी बदलकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। यदि आतिशी अपने विधायकों को एकजुट रखने में भी सफल रहीं तो यह उनकी बड़ी काबिलियत मानी जायेगी। सदन में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, दिलीप पांडे, रामनिवास गोयल, रेखा बिड़लान के न होते हुए प्रचंड बहुमत के बल पर गरजती भाजपा के सामने आतिशी की यह चुनौती काफी बड़ी होगी।