फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi: महिलाओं के हवाले दिल्ली, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर नेता विपक्ष की जिम्मेदारी भी महिला के कंधे पर

सार

दिल्ली में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री पद पर भले ही बहुत कम समय तक सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही थीं। दिल्ली की दूसरी महिला मुख्यमंत्री  शीला दीक्षित ने तो राजधानी का जिस तरीके से कायापलट किया, उससे वे विकास की पर्याय ही बन गईं।
विज्ञापन
दिल्ली की सियासत - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले चुनावों की तुलना में इस बार कम महिलाओं ने दिल्ली चुनाव में बाजी मारी है। इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की चार तो आम आदमी पार्टी की केवल एक महिला प्रत्याशी जीत हासिल करने में सफल रही। हालांकि, फिलहाल देश और दिल्ली की राजनीति में महिला मतदाताओं के असर को देखते हुए दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और आम आदमी पार्टी ने यहां अपनी कमान महिलाओं के हाथ में सौंप दी है। भाजपा ने शालीमार बाग से विधायक रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर आधी आबादी को सम्मान देने का काम किया था। वहीं, अब आम आदमी पार्टी ने कालकाजी सीट से जीतने वाली आतिशी को नेता प्रतिपक्ष बनाकर सदन और सदन के बाहर आम आदमी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी है। यानी सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दिल्ली की राजनीतिक दिशा को तय करने का काम केवल महिलाएं ही करेंगी। 

विज्ञापन


रेखा गुप्ता अपने मंत्रिमंडल के सहारे दिल्ली के विकास का खाका खींचेंगी तो आतिशी मारलेना सरकार से हो रही चूक पर सरकार और जनता का ध्यान खींचने का काम करेंगी। अपने आप में यह बड़ा राजनीतिक  बदलाव है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों पक्षों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं के ही हाथ में होगी। यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष ने बेहतर काम किया तो आने वाले समय में राजनीति में यह एक बेहतर उदाहरण बन सकता है। महिलाओं को नेतृत्व देने में संकोच करते आ रहे राजनीतिक दलों में नेतृत्व के मोर्चे पर इससे कुछ बड़े बदलाव के संकेत भी देखने को मिल सकते हैं।   

दिल्ली में महिलाओं की राजनीतिक भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री पद पर भले ही बहुत कम समय तक सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही थीं। दिल्ली की दूसरी महिला मुख्यमंत्री  शीला दीक्षित ने तो राजधानी का जिस तरीके से कायापलट किया, उससे वे विकास की पर्याय ही बन गईं। दिल्ली में कांग्रेस की राजनीति आज भी शीला दीक्षित के नाम के इर्दगिर्द ही घूमती है। 
विज्ञापन


आतिशी को अरविंद केजरीवाल ने विकट परिस्थितियों में मुख्यमंत्री बनाया था। एक मुख्यमंत्री के तौर पर कुछ साबित करने के लिए उनके पास अधिक समय नहीं था, लेकिन फिर भी वे अपने कामकाज से प्रभाव छोड़ती दिखाई पड़ीं। अब नेता प्रतिपक्ष के रूप में आतिशी के पास एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती होगी। उन्हें आम आदमी पार्टी का जनता के बीच वह खोया विश्वास वापस लाने की जिम्मेदारी है जो कभी केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की असली ताकत हुआ करता था। यदि वे सरकार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने में सफल रहती हैं तो उन्हें इस काम में मदद मिल सकती है।

विज्ञापन

भाजपा विधायक दल की बैठक का दृश्य। - फोटो : Amar Ujala
रेखा गुप्ता की दमदार बैटिंग
रविवार को भाजपा के विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने मजबूत इरादों को जाहिर कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब तक रोकी गई सभी कैग रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखेगी। इससे जनता को यह जानने को मिलेगा कि पिछली सरकार ने जनता के हितों के साथ किन-किन मुद्दों पर समझौता करने का काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कर्ता-धर्ता लोगों को भ्रष्टाचार के रूप में ली गई जनता की गाढ़ी कमाई वापस करनी पड़ेगी। रेखा गुप्ता के तेवर बता रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने वाली नहीं हैं। 

उनके ऊपर आरएसएस-भाजपा के वैचारिक मॉडल की सत्ता की धमक को पूरी मजबूती से स्थापित करने की भी है। दिल्ली की प्रदेश स्तर की राजनीति की आवाज किसी भी दूसरे प्रदेश की तुलना में अधिक सुनी जाती है। ऐसे में दिल्ली में राजनीति की एक बड़ी 'रेखा' खींचकर भाजपा उसे दूसरे राज्यों में भुनाने की कोशिश अवश्य करेगी। रेखा गुप्ता के लिए यह चुनौती किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगी। 

रेखा गुप्ता सरकार के इन्हीं आक्रामक तेवरों के बीच आतिशी को आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का बचाव करने की चुनौती होगी। आम आदमी की आगे की राजनीति कितना आगे बढ़ेगी, यहां तक की आने वाले समय में अरविंद केजरीवाल और खुद पार्टी का भविष्य क्या होगा, बहुत हद तक यह आतिशी की इस नई पारी पर निर्भर करेगा। अभी से यह आशंका जताई जाने लगी है कि देर-सबेर आम आदमी पार्टी के कुछ विधायक पार्टी बदलकर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। यदि आतिशी अपने विधायकों को एकजुट रखने में भी सफल रहीं तो यह उनकी बड़ी काबिलियत मानी जायेगी। सदन में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, दिलीप पांडे, रामनिवास गोयल, रेखा बिड़लान के न होते हुए प्रचंड बहुमत के बल पर गरजती भाजपा के सामने आतिशी की यह चुनौती काफी बड़ी होगी। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें