रविवार तड़के फिल्मिस्तान की अनाज मंडी में लगी आग ने 43 परिवारों की जिंदगी में अंधेरा कर दिया है। मकान की तंग गली में दमकल विभाग की गाड़ियों को पहुंचने में ज्यादा समय लगा और एक बार में एक से ज्यादा गाड़ियां बचाव कार्य में नहीं लगाई जा सकीं। गाड़ियों को घटनास्थल से काफी दूर ही रोकना पड़ा और पाइप के जरिए पानी पहुंचाकर आग पर काबू पाया गया।
समय ज्यादा लगने के कारण मौत का आंकड़ा ज्यादा हो गया। जानकारों का कहना है कि अगर मकान तक अग्निशमन सेवा की सुविधाएं जल्दी मिल पाई होतीं तो और अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी। घटना के वक्त मकान में सौ से ज्यादा लोग थे जिनमें साठ से ज्यादा लोगों को बचा लिया गया था।
इसी तरह की तंग गलियों में अग्निशमन सेवा कार्य के लिए बाइक दमकल सेवा की शुरुआत की गई थी। इन्हें भारी इंजन क्षमता वाली आधुनिक मोटरसाइकिलों में थोड़े बदलाव के साथ बनाया गया था। लेकिन अपने प्रायोगिक दौर में ही यह सेवा सफल नहीं हो पाई और कुछ ही दिनों के बाद इसे बंद करना पड़ा।
मोटर साइकिल दमकल क्यों हुईं असफल
दरअसल, प्रायोगिक तौर पर शुरुआत में दस मोटरसाइकिलों को मॉडीफाई करके मोटरसाइकिल दमकल गाड़ियां बनाईं गई थीं। इनमें एक जेट पंप लगाया गया था जो पानी को लगभग 60-70 मीटर की दूरी तक फेंक तक पहुंचा सकता था। पानी की सप्लाई के लिए मोटर साइकिल के पीछे दो सिलेंडर लगाए गए थे जिनमें प्रत्येक की क्षमता नौ-नौ लीटर की थी। इन्हें कनाट प्लेस, करोलबाग, तेलीवाड़ा और दरियागंज में लगाया गया था।
प्रयोग के दौरान देखा गया कि इतने कम पानी से आग बुझती नहीं थी। उलटे कुछ मामलों में यह और अधिक भड़क जाती थी। पानी जल्दी खत्म हो जाता था, और पानी भरने के लिए मोटरसाइकिल को जल्दी ही वापस ले जाना पड़ता था। इसमें बहुत समय लगता था। इन तमाम व्यावहारिक कारणों की वजह से यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया।