दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
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दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के दौरान नौकरी करने का उद्देश्य रखने की बजाय उद्यमी बनने की सोच रखनी चाहिए। यही सोच शिक्षा को ज्यादा बेहतर उद्देश्य प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि अभी तक हम केवल नौकरी करने का दृष्टिकोण रखते हैं, लेकिन यह तरीका हमारे ज्ञान को सीमित करता है। इस तरह सबको नौकरी देना भी संभव नहीं होता। सिसोदिया के अनुसार उद्यमिता पाठ्यक्रम के जरिए नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों के भीतर एक नई समझ पैदा करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षा मंत्री ने यह बात उद्योगपति किरण मजूमदार शॉ के साथ स्कूली बच्चों के साथ बातचीत के एक कार्यक्रम के दौरान कही।
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार का सपना है कि इन्हीं बच्चों में से भविष्य में कई सफल उद्यमी निकलकर सामने आएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में उद्यमिता पाठ्यक्रम के पीछे दूरगामी सोच काम कर रही है। अब तक हमारी शिक्षा प्रणाली में महज नौकरी की मानसिकता पैदा की जाती थी। लेकिन दिल्ली सरकार की कोशिश है कि बच्चे नौकरी के साथ-साथ अपना काम करने के लिए भी पढ़ाई करें। उन्होंने कहा कि हमें विज्ञान को डॉक्टर या इंजीनियर बनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन के तरीके के रूप में देखना चाहिए।
बातचीत के दौरान एक छात्रा ने कहा कि हमारे परिवार में तो बस हमारी पढ़ाई के बाद शादी कराने की बात होती है। इस पर सिसोदिया ने कहा कि आज की बेटी दुनिया की सबसे सफल उद्योगपति बन सकती है। बाकी सबको भी यही उद्देश्य रखना चाहिए। परिवार के लोगों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।
बातचीत के दौरान चर्चित उद्यमी किरण मजूमदार शॉ ने बताया कि उन्होंने बंगलूरू विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक करने के बाद आस्ट्रेलिया से पढ़ाई की। वहां से लौटने के बाद 1978 में अपने गैराज से कंपनी शुरू की। उनके पास पूंजी नहीं थी और बैंकों ने कर्ज देने से मना कर दिया। अंत में एक बैंक ने उनके प्रोजेक्ट का महत्व समझा और लोन दे दिया। मजूमदार ने कहा कि आपको कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य के साथ बिजनेस शुरू करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।