जानकारी के अनुसार, नौ महीने के इस मासूम बच्चे का नाम अली हमाद है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि हमाद की मां ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपने लीवर का एक हिस्सा दे दिया। बच्चे की मां ने जानकारी दी कि अली हमाद ने तीन बच्चों के बाद जन्म लिया था। उनका कहना है कि उन तीनों बच्चों की शायद इसी तरह की बीमारी से मौत हो गई थी, जिनका समय पर इलाज नहीं किया जा सका था।
लीवर प्रत्यारोपण और हेपटो-पैनक्रियाटिक-बिलियरी सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र लालवानी ने बताया कि तीन जनवरी को हमाद का प्रत्यारोपण किया गया और 26 जनवरी को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। उनके अनुसार, लीवर में खून की आपूर्ति नहीं होना किसी भी लीवर प्रत्यारोपण करने वाली टीम के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि प्रत्यारोपण वाले बाल रोगियों में नाड़ी संबंधी जटिलताएं अधिक होती हैं।
उन्होंने कहा, "बच्चे की यकृत धमनी में कोई प्रवाह नहीं था। हमने लीवर में रक्त का प्रवाह देने के लिए नस ग्राफ्ट लगाया। सर्जरी के बाद बच्चे को वेंटिलेटर पर आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया।" डॉक्टर ने यह भी कहा, ‘‘हमाद को अगली सुबह वेंटिलेटर से हटा दिया गया और अगले कुछ दिनों में, धीरे-धीरे उसे मुंह के जरिये खाना खिलाना भी शुरू कर दिया गया। सर्जरी के 20 दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।’’ अस्पताल के कंसल्टेंट पैडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सुफला सक्सेना ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में समय पर उपचार बहुत महत्वपूर्ण है और हमाद सही समय पर अस्पताल आ गया। यह मामला किसी वास्तविक चमत्कार से कम नहीं है।’’