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समलैंगिकता को बीमारी बताकर डॉक्टर देता था शॉक, कोर्ट ने भेजा समन

Sun, 09 Dec 2018 10:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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दिल्ली की एक अदालत ने समलैंगिकता को बिमारी बताकर गे और लेस्बियन लोगों को बिजली के झटके देकर इलाज करने वाले डॉक्टर को आरोपी के तौर पर तलब किया है। डॉक्टर का दावा है कि समलैंगिकता एक मानसिक विकृति है और बिजली का झटका देकर इसे ठीक किया जा सकता है। आरोपी डॉक्टर का नाम पीके गुप्ता है। उसके खिलाफ दिल्ली चिकित्सा परिषद (डीएमसी) ने शिकायत की थी। 

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शिकायत में डीएमसी का कहना है कि 2016 में ही डॉक्टर गुप्ता को प्रैक्टिस करने से रोक दिया गया था। मगर वह अब भी खुद को डॉक्टर बताकर ऐसी क्रूर और अजीब प्रैक्टिस के जरिए लोगों का इलाज कर रहा है। इसी वजह से उसके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की आवश्यकता है। डीएमसी ने दावा किया है कि डॉक्टर गुप्ता हार्मोनल और शॉक थेरेपी से इलाज करता है।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा का कहना है कि कन्वर्जन थेरेपी के तौर पर आरोपी डॉक्टर द्वारा किया जा रहा इलाज न तो चिकित्सा विज्ञान और न ही कानून की नजर में मान्यता प्राप्त है। कनवर्जन थेरेपी मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दखल के साथ किसी शख्स का यौन व्यवहार बदलने की कोशिश है। शुरुआती जांच में आरोपी ने डीएमसी के कानूनों का उल्लंघन किया है। जिसके लिए एक साल की सजा है।
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अपने समन में अदालत ने समलैंगिकता पर उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का जिक्र किया है जिसमें दो वयस्कों के आपसी सहमति से बने यौन संबंध को अपराध नहीं माना गया है। अदालत के अनुसार 15 मिनट की काउंसिलिंग के लिए गुप्ता 4500 रुपये लेता और उसके बाद हार्मोन थेरेपी के जरिए उनका इलाज करता था। डीएमसी ने जब डॉक्टर को नोटिस जारी किया तो उसने कहा कि वह परिषद में पंजीकृत नहीं है इसलिए जवाब देने के लिए जिम्मेदार नहीं है।

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