दिल्ली की एक अदालत ने कथित उर्वरक घोटाले से जुड़े धनशोधन के मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को बुधवार को जमानत दे दी। विशेष न्यायाधीश विकास ढुल ने पुरी को यह राहत तब दी जब वह अपने खिलाफ जारी समन के बाद अदालत में पेश हुए। अदालत ने मामले में पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए 23 दिसंबर को पुरी के खिलाफ समन जारी किया था।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने ध्यान दिया कि पुरी को जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि इस चरण में उन्हें हिरासत में भेजने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। ईडी के विशेष लोक अभियोजक नितेश राणा ने पुरी की जमानत याचिका का विरोध किया और दावा किया कि अगर राहत दी जाती है तो आरोपी न्याय से भाग सकता है। राणा ने कहा कि पुरी गवाहों को भी प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
पुरी को समन जारी करते हुए न्यायाधीश ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उन पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। पुरी अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले और मोजर बेयर घोटाले से जुड़े मामलों में भी आरोपी हैं। वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
ईडी के मुताबिक, उर्वरक घोटाला मामले में राजद के राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह और इफको के प्रबंध निदेशक और सीईओ यू एस अवस्थी भी शामिल हैं। एजेंसी के मुताबिक, यह घोटाला अवस्थी और इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के प्रबंध निदेशक पीएस गहलोत और कुछ अन्य के एनआरआई बेटों को 2007-14 के दौरान विदेशी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर 685 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध कमीशन से संबंधित है।
ईडी ने कहा कि इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) एक बहु-राज्यीय किसान सहकारी संस्था है, जबकि आईपीएल उर्वरकों की आपूर्ति में शामिल है, जिसके लिए सरकार दरों को सस्ती रखने के लिए सब्सिडी प्रदान करती है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अवस्थी और इफको के अन्य लोगों ने अपराध से आय अर्जित की और इसे विभिन्न असंबंधित संस्थाओं के माध्यम से स्तरित किया, और इसका एक हिस्सा अवस्थी और अन्य द्वारा नियंत्रित संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया।