Subhash Chopra and Arvinder Singh Lovely in Delhi Pradesh Congress Rally
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अब सिर्फ दो माह का समय शेष बचा है। ऐसे में पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों के नामों पर मंथन करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने हर सीट पर जिताऊ उम्मीदवारों के नामों की खोज शुरु कर दी है। कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन में इस बार भी जिला और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं की आवाज को महत्व दिया जाएगा और किसी क्षेत्र के उम्मीदवारों के चयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
सूत्रों के अनुसार टिकटों की आधिकारिक घोषणा के पूर्व ही पार्टी ने लगभग दो दर्जन उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में अभी से तैयारी शुरू करने को कह दिया है। बाकी सीटों पर भी मजबूत उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जा रहा है।
जिताऊ उम्मीदवारों को उतारने की कोशिश
दरअसल, दिल्ली कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मिली वोटों की बढ़त का हर दृष्टिकोण से विश्लेषण कर रही है। उसका मानना है कि लोकसभा चुनावों में उसके वोटरों का दुबारा उसकी तरफ देखने का बड़ा कारण उसके उम्मीदवारों का मजबूत कद का होना भी था। जबकि उसके सामने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कमजोर थे। यही कारण है कि जनता ने उनके उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि इस बार भी वह मजबूत उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारना चाहती है।
दिग्गज उतरेंगे विधानसभा चुनाव में
पार्टी अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने इसके पहले ही संकेत दे दिया है कि वे विधानसभा चुनाव के दौरान महिला और युवा उम्मीदवारों पर दांव लगाएंगे। लेकिन इसके साथ ही पार्टी के बड़े चेहरों को भी मैदान में उतारा जाएगा। इनमें लोकसभा चुनाव लड़ चुके अरविंदर सिंह लवली, अजय माकन, राजेश लिलोठिया और जेपी अग्रवाल का नाम शामिल है। इनके अलावा दूसरी पार्टी से कांग्रेस में आए कुछ बड़े चेहरों को भी मैदान में उतारने पर विचार किया जा रहा है।
पिछले विधानसभा चुनाव में
वर्ष 2015 में विधानसभा के लिए सात फरवरी को मतदान हुआ था। 10 फरवरी को चुनावों का परिणाम घोषित किया गया था। 14 फरवरी 2015 को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इस प्रकार इस बार भी चुनाव 14 फरवरी के पहले संपन्न हो जाएंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि दिसंबर माह के अंत में चुनावों की अधिसूचना जारी हो जाएगी।
इस प्रकार देखें तो किसी उम्मीदवार को अपने प्रचार के लिए अधिकतम दो माह का समय मिलने वाला है। कांग्रेस पार्टी के लिए यही चिंता का सबब बना हुआ है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में उसके एक भी प्रत्याशी को जीत हासिल नहीं हुई थी।