दिल्ली में सोमवार को लाल किले के पास हुए बम धमाके को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, यह हमला आत्मघाती हमला नहीं था, बल्कि संदिग्ध ने दवाब और घबराहट में विस्फोट कर दिया था। सूत्रों ने ये भी दावा किया है कि बम पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था, इसलिए इसका प्रभाव सीमित रहा। बता दें कि इस विस्फोट में 10 लोगों की मौत हुई है और 25 घायल हुए हैं। लाल किले बम धमाके की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) कौ सौंप दी गई है।
अधूरा था बम?
एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी जानकारी में बताया कि यह आत्मघाती हमला नहीं था। संदिग्ध ने घबराहट में विस्फोट कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि बम अधूरा और पूरी तरह विकसित नहीं था, जिसके कारण उसका प्रभाव सीमित रहा। विस्फोट से कोई गड्ढा नहीं बना और न ही कोई छर्रे या नुकीली धातु मिली। धमाका उस समय हुआ जब वाहन चल रहा था और आईईडी इतनी शक्तिशाली नहीं थी कि भारी जनहानि कर सके।
माना जा रहा है कि दिल्ली-एनसीआर और पुलवामा में सुरक्षा एजेंसियों की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह तथ्य निकलकर सामने आ रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में लगातार छापेमारी और विस्फोटक बरामदगी के बाद संदिग्ध पर दबाव बढ़ गया था। जांच एजेंसियों को प्राथमिक जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि बढ़ते दबाव के कारण आरोपी ने गड़बड़ी में बम को सक्रिय कर दिया।
हमले में प्रयोग किया गया नया तरीका?
संदिग्ध ने आत्मघाती कार बम हमले का सामान्य तरीका नहीं अपनाया। उसने न तो किसी लक्ष्य में कार घुसाई और न ही जानबूझकर टक्कर मारी। सुरक्षा एजेंसियों की देशव्यापी सतर्कता और समन्वित कार्रवाई के कारण एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम किया गया।
गिरफ्तारी के डर से आतंकी हमला करने की आशंका
दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपने आतंकवादी मॉड्यूल के साथी चिकित्सकों की गिरफ्तारी के बाद उमर मोहम्मद ने डर के कारण लाल किले के सामने आतंकवादी हमला किया, क्योंकि उसे भी गिरफ्तार होने का डर था। विस्फोट के बाद, राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी सीमा बिंदुओं पर वाहनों की जांच तेज की जा चुकी है। विस्फोट से पहले, कार पास के एक पार्किंग स्थल में तीन घंटे तक खड़ी रही थी। विभिन्न पार्किंग स्थल के फुटेज की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि संदिग्धों का पता लगाने के लिए दारियागंज और पहाडग़ंज क्षेत्रों में रात भर तलाशी अभियान चलाया गया।
ये भी पढें: सेकेंड हैंड कार ने दिल्ली को कई बार दहलाया: क्यों होता है धमाके में इन गाड़ियों का इस्तेमाल? कब-कब हुए ब्लास्ट
फरीदाबाद से चार दिन पहले ही खरीदी गई थी कार
धमाके में इस्तेमाल आई20 कार फरीदाबाद के डीलर से चार दिन पहले ही खरीदी गई थी। डीलर को दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई है। फरीदाबाद के सेक्टर 37 में रॉयल कार जोन के कार डीलर सोनू का ऑफिस है। इसने ओएलएक्स पर कार सेल की विज्ञापन पोस्ट किया था। इसके बाद कार बिकी। फरीदाबाद पुलिस प्रवक्ता यशपाल सिंह ने बताया कि सोनू को पकड़कर दिल्ली स्पेशल सेल के हवाले कर दिया गया है।
धमाके वाली कार गुरुग्राम में रजिस्टर्ड है, सात बार बेची जा चुकी है
लाल किले के सामने जिस आई-20 कार में धमाका हुआ है वह वह हरियाणा की है। ये कार गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ पर यह कार रजिस्टर्ड बताई जा रही है। यह एक साल में सात बार बेची जा चुकी है। पुलिस ने पुष्टि की कि यह धमाका सुनियोजित आतंकी साजिश का नतीजा था।
सलमान हिरासत में, आरटीओ से होगी असली पहचान
सूत्रों के मुताबिक, हुंडई आई 20 कार शुरुआत में सलमान नाम के एक शख्स के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस ने फौरन सलमान को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान सलमान ने दावा किया कि उसने वह कार आगे किसी और को बेच दी थी।