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Delhi BJP: भाजपा में पूर्वांचलियों की उपेक्षा जारी, नगर निगम जोन चेयरमैन के चुनावों में एक भी पूर्वांचली नहीं

सार

दिल्ली नगर निगम के 12 जोन में हो रहे चेयरमैन पद के चुनाव में पार्टी ने एक भी पूर्वांचली को मैदान में नहीं उतारा है। दो दिन पहले ही पार्टी ने दिल्ली के सभी 14 सांगठनिक जिलों के अध्यक्षों की सूची जारी की थी। इसमें भी एक भी पूर्वांचली को अध्यक्ष नहीं बनाया गया था। 
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भाजपा का झंडा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली भाजपा में पूर्वांचलियों की उपेक्षा लगातार जारी है। दिल्ली नगर निगम के 12 जोन में हो रहे चेयरमैन पद के चुनाव में पार्टी ने एक भी पूर्वांचली को मैदान में नहीं उतारा है। इन्हीं जोन के डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए हो रहे चुनाव में एक मात्र पूर्वांचली महिला उम्मीदवार सुमन कुमारी को सिविल लाइन से मैदान में उतारा गया है। इसके दो दिन पहले ही पार्टी ने दिल्ली के सभी 14 सांगठनिक जिलों के अध्यक्षों की सूची जारी की थी। इसमें भी एक भी पूर्वांचली को अध्यक्ष नहीं बनाया गया था। 
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भाजपा ने दिल्ली नगर निगम के जोन के चेयरमैन पदों पर चुनाव के लिए सिविल लाइन से गुलाब सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। केशव पुरम से विकेश सेठी को, नरेला से बबिता, सेंट्रल जोन से योगिता सिंह, साउथ जोन से उमेद सिंह, नजफगढ़ जोन से सविता, शहादरा उत्तरी से पुनीत शर्मा और शहादरा दक्षिण से राम किशोर शर्मा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। इनमें से कोई भी उम्मीदवार पूर्वांचल से नहीं है। करोल बाग जोन, पहाड़गंज, रोहिणी, वेस्ट जोन से भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। 

डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए भाजपा ने दस जोन में अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। इनमें से सिविल लाइन से सुमन कुमारी को छोड़कर कोई भी उम्मीदवार पूर्वांचल से नहीं है। 
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पूर्वांचल के भाजपा कार्यकर्ताओं में इसको लेकर काफी आक्रोश है। पूर्वांचली भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि दो दिन पूर्व ही जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के मामले में भी उनकी जमकर उपेक्षा की गई थी। पूर्वांचली समुदाय के कार्यकर्ताओं ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर जमकर अपनी नाराजगी प्रकट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया है।  

विधानसभा से लेकर नगर निगम तक जारी है उपेक्षा
दिल्ली भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला को बताया कि पहले दिल्ली विधानसभा चुनावों में पूर्वांचली समुदाय की जमकर उपेक्षा की गई थी। पूरी दिल्ली में एक तिहाई से अधिक जनसंख्या और 20 से अधिक विधानसभा सीटों पर परिणाम बदल देने वाले असर के बाद भी केवल पांच पूर्वांचलियों को विधानसभा में चुनाव में उतारा गया था। इसी प्रकार जिलाध्यक्षों के चयन में भी पूर्वांचल के लोगों की जमकर उपेक्षा की गई और एक भी जिलाध्यक्ष पूर्वांचल से नहीं बनाया गया। 

इसके बाद अब नगर निगम के एक दर्जन चेयरमैन पदों के लिए हो रहे चुनाव में भी पार्टी ने अपने एक भी पूर्वांचली कार्यकर्ता को इसके योग्य नहीं समझा। यह बात पूर्वांचल के कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है। नेता ने कहा कि पूर्वांचली कार्यकर्ताओं की यह उपेक्षा समझ में नहीं आती है। उन्होंने कहा कि चुनाव हो या पार्टी का कोई कार्यक्रम भीड़ जुटाने में सबसे अधिक पूर्वांचल का कार्यकर्ता ही आगे रहता है। लेकिन यदि उसे विधानसभा, पार्टी संगठन से लेकर नगर निगम तक कहीं उसको भागीदारी नहीं मिलेगी तो इससे गलत संदेश जाएगा। पार्टी को इस पर विचार करते हुए निर्णय करना चाहिए। 

आम आदमी पार्टी को मिला मौका
भाजपा के अंदर इस मुद्दे पर चल रहे तनाव के बीच आम आदमी पार्टी ने जमकर हमला बोला है। आप नेता ऋतुराज झा ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर  आरोप लगाया कि भाजपा 50 लाख से अधिक की जनसंख्या वाले पूर्वांचली समुदाय का वोट तो लेना चाहती है, लेकिन उन्हें सत्ता-संगठन में कोई हिस्सेदारी नहीं देना चाहती। यह बात एक बार नहीं बार-बार साबित हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पूर्वांचलियों को पूरा मान-सम्मान और सीटों में हिस्सेदारी दी है, इसी का असर रहा है कि एक बार दिल्ली विधानसभा में एक दर्जन से ज्यादा पूर्वांचली नेता विधायक चुने गए थे। 
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