दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं की भूमिका सिर्फ चुनाव प्रचार तक सीमित कर दी है। चुनाव रणनीति की कमान गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने संभाल ली है। पार्टी की रणनीति बेहतर बूथ प्रबंधन के जरिये चुनाव को राष्ट्रवाद की पिच पर लाने की है। इसके लिए सभी नेता राम मंदिर निर्माण, नागरिकता संशोधन कानून और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
लोकसभा चुनाव का वोट बरकरार रखने के लिए पार्टी की रणनीति बड़ी की जगह छोटी रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और सर्वाधिक घर-घर संपर्क करने की है। यही कारण है कि खुद शाह और नड्डा भी बड़ी के बदले छोटी रैलियां कर रहे हैं। बड़ी रैलियों की जगह इनके अधिक से अधिक रोडशो कराने के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं को भी घर घर संपर्क करने के लिए कहा गया है।
बीते विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया था। इस बार पार्टी की रणनीति उन्हें अंतिम समय में मैदान में उतारने की है। पीएम की तीन से चार रैलियां हो सकती हैं। इसके अलावा उनके रोड शो कराने के विकल्प पर भी विचार हो रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि अंतिम समय में पीएम के चुनाव प्रचार में उतरने से पार्टी के पक्ष में एकाएक माहौल तैयार होगा।