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Mundka Assembly Seat: सबसे अमीर विधायक खोलेंगे कांग्रेस खाता या किसी और को मिलेगी जीत, ऐसा है चुनावी इतिहास

Tue, 21 Jan 2025 06:32 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Mundka Seat: दिल्ली में चुनावों के लिए मैदान सज चुका है। सभी प्रत्याशी मैदान में अपना दाव लगाने की तैयारी कर चुके हैं। पिछली बार इस सीट से आप के धर्मपाल लाकड़ा विधायक थे। ये आप के सबसे अमीर प्रत्याशियों में से एक थे। इस बार ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।    

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार जारी है। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस चुनाव में हर पार्टी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रही है। किसकी रेवड़ी में सबसे ज्यादा मिठास रही ये 8 फरवरी को पता चलेगा। जब नतीजे आएंगे। इन नतीजों में कुछ सीटों पर सबकी नजर रहेगी। ऐसी ही एक मुंडका विधानसभा सीट है। 2020 में यहां से जीते धर्मपाल लाकड़ा मौजूदा विधायकों में सबसे अमीर विधायक हैं। लाड़का इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में बादली में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…
 

दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

कैसे रहा मुंडका में चुनावों का इतिहास?
दिल्ली विधानसभा के गठन के बाद 1993 में पहले चुनाव हुए। उस वक्त मुंडका विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद मुंडका विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। 2008 के विधानसभा चुनाव में मुंडका सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच टक्कार हुई। इस मुकाबले में भाजपा के मनोज कुमार जीतने में सफल रहे। उन्हें 47,355 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के प्रेम चंद्र कौशिक को 14,897 वोट से हराया। कांग्रेस उम्मीदवार को 32,458 वोट मिले।  

दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013 में निर्दलीय उम्मीदवार को जीत
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। 2013 के इस चुनाव में मुंडका सीट पर एक खास बात रही। यहां से न ही भाजपा, न ही कांग्रेस और न ही आप को जीत मिली। यहां निर्दलीय चुनाव लड़ रहे रामबीर शौकीन को जीत मिली।  रामबीर शौकीन ने भाजपा के आजाद सिंह को 7,134 वोट से हरा दिया था। आप और कांग्रेस के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। 

2015 में आप को बड़ी जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

इस सीट पर 2015 में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। आप ने यहां से सुखवीर सिंह को मैदन में उतारा। उन्हें 94,206 वोट मिले। सुखवीर सिंह ने भाजपा के भाजपा के आजाद सिंह को 40,826 वोट से हरा दिया। भाजपा के आजाद सिंह को 53,380 वोट मिले थे। अन्य 13 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 

2020 आप दर्ज की लगातार दूसरी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। मुंडका के नतीजों की बात करें तो यहां से आप की तरफ के धर्मपाल लाकड़ा को जीत मिली। आप नेता ने भाजपा के आजाद सिंह को 19158 वोट से पटखनी दी थी। आप को 90,293 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रही भाजपा को 71,135 वोट मिले। लाकड़ा मौजूदा विधानसभा के सबसे अमीर विधायक हैं। 

 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 

इस बार आम आदमी पार्टी ने मुंडका सीट पर जसबीर कराला को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने 2020 में आप के टिकट पर जीते धर्मपाल लाकड़ा को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा के टिकट पर गजेन्द्र दराल मैदान में हैं। 
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