जांच और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
सरकार की ओर से इस समस्या की पहचान के बाद कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें डीजीसीए ने जीएनएसएस इंटरफेरेंस से निपटने के लिए एडवाइजरी जारी की। वहीं जीपीएस स्पूफिंग की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए नई एसओपी लागू की गई। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने डब्ल्यूएमओ को इंटरफेरेंस के स्रोत का पता लगाने को कहा और डब्ल्यूएमओ से संसाधन बढ़ाने और संदिग्ध स्थानों की जांच करने के निर्देश भी दिए गए।
साइबर सुरक्षा भी हुई मजबूत
एविएशन सेक्टर पर बढ़ते रैनसमवेयर और मैलवेयर जैसे साइबर खतरों को ध्यान में रखते हुए- एएआई ने आईटी नेटवर्क और इन्फ्रास्ट्रक्चर में उन्नत साइबर सिक्योरिटी लागू की है। सभी उपाय एनसीआईआईपीसी और सीईआरटी-आईएन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं। वहीं खतरे के प्रकार में बदलाव के साथ सुरक्षा सिस्टम लगातार अपग्रेड किए जा रहे हैं।
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पहले सरकार ने क्या दिया था आंकड़ा
वहीं इससे पहले केंद्र सरकार ने संसद में एक आंकड़ा पेश किया था। सरकार ने लोकसभा में बताया था कि नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच 465 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र (अमृतसर और जम्मू) में दर्ज की गईं। वहीं अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में 4.3 लाख जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2023 की तुलना में 62% अधिक हैं।