दिल्ली एयरपोर्ट पर टर्मिनल एक और तीन के बीच यात्रियों के सीधे ट्रांसफर की योजना है। इसके लिए बीसीएएस की मंजूरी का इंतजार है। इस सुविधा को शुरू होने के बाद इलेक्ट्रिक बसों के जरिए यात्री सिर्फ 25 मिनट में एक से दूसरे टर्मिनल पहुंच सकेंगे।
दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी डायल (DIAL) एक नई सुविधा शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत यात्री टर्मिनल एक और टर्मिनल तीन के बीच एयरपोर्ट के अंदर से ही (एयरसाइड) आ-जा सकेंगे। इस सुविधा के शुरू होने के बाद एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल पहुंचने में औसतन सिर्फ 25 मिनट का समय लगेगा। फिलहाल डायल को इसके लिए विमानन सुरक्षा संस्था बीसीएएस (BCAS) से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है।
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यह योजना पिछले कुछ समय से चल रही है और इसमें कई बदलाव किए गए हैं। हाल ही में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। दिल्ली एयरपोर्ट पर हर दिन लगभग 2.25 लाख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्री आते हैं। इनमें से करीब 26 प्रतिशत यात्री ऐसे होते हैं जिन्हें एक फ्लाइट से उतरकर दूसरी फ्लाइट पकड़नी होती है। इन्हें 'ट्रांसफर पैसेंजर' कहा जाता है।
शुरुआत में यह सुविधा उन यात्रियों को मिलेगी जिनके पास एक ही बुकिंग या सिंगल पीएनआर (PNR) पर कनेक्टिंग फ्लाइट होगी। यह सुविधा घरेलू से अंतरराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय से घरेलू उड़ान पकड़ने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। एयरपोर्ट पर कुल तीन टर्मिनल हैं-T1, T2 और T3। इनमें से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें केवल टर्मिनल तीन से ही संचालित होती हैं।
इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी में सीआईएसएफ, बीसीएएस, सीमा शुल्क विभाग (Customs) और आईबी (IB) के प्रतिनिधि शामिल थे। योजना का प्रस्ताव करीब एक से डेढ़ महीने पहले जमा किया गया था। जैसे ही बीसीएएस से हरी झंडी मिलेगी, यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक ले जाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल शुरू होगा।
अभी टर्मिनल एक और टर्मिनल तीन के बीच काफी दूरी है। यात्रियों को एक से दूसरे टर्मिनल जाने के लिए बाहर सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। इसमें काफी समय और परेशानी होती है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से हर दिन 1,300 से ज्यादा विमानों की आवाजाही होती है। नई सुविधा से कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों का सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा।