वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ऑड-ईवन योजना को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि ऑड-ईवन योजना के पीछे क्या तर्क है? डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाना हम समझ सकते हैं, लेकिन ऑड-ईवन योजना के पीछे की वजह क्या है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि वह शुक्रवार तक डेटा या रिकॉर्ड से यह साबित करे कि ऑड-ईवन योजना से दिल्ली में प्रदूषण कम हुआ है। यहां तक कि ऑटो और टैक्सियां लगातार सड़कों पर चल रही हैं।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोई बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी डीजल जनरेटर का उपयोग न हो। राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति आज बैठक करेगी और छह नवंबर को कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर अंकुश लगाने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार लगाई और कहा कि उन्होंने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है। अदालत ने कहा, 'दिल्ली की आबोहवा साल दर साल और दमघोंटू होती जा रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हर साल यह हो रहा है और 10-15 दिनों से लगातार ऐसा हो रहा है। सभ्य देशों में ऐसा नहीं होता है। जीने का अधिकार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।'
प्रदूषण पर न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता ने सुनवाई करते हुए कहा, 'इस तरीके से हम जी नहीं सकते। केंद्र और राज्य सरकार को कुछ करना होगा। ऐसा नहीं चलेगा। यह बहुत हो गया है। इस शहर में रहने के लिए कोई भी घर यहां तक कि कोई कमरा भी सुरक्षित नहीं है। यह अत्याचार है।
उन्होंने कहा कि हम अपनी जिंदगी के कई बहुमूल्य साल इसकी वजह से खो रहे हैं। स्थिति विकट है। केंद्र और दिल्ली सरकार क्या करना चाहते हैं? आप इस प्रदूषण को कम करने के लिए क्या करने का इरादा रखते हैं?' जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, हम राज्यों के मुख्य सचिवों, ग्राम प्रधान, स्थानीय अधिकारियों, पुलिस को समन भेजेंगे जो पराली जलाने से रोकने में नाकाम रहे।