संयुक्त राष्ट्र की बाल कल्याण संस्था (यूनिसेफ) ने विश्व समुदाय को आगाह किया है कि नई दिल्ली में वायु प्रदूषण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना विश्व समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए शीघ्र निर्णायक पहल शुरू की जाए। एजेंसी का कहना है कि भारत की राजधानी में धुंध और इसका प्रतिकूल प्रभाव नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।
यूनिसेफ ने बयान जारी कर कहा कि धुंध दिल्ली की आम समस्या बन गई है। दिल्ली के बच्चे हर सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। दिल्ली की स्थिति विश्व के लिए खतरे की घंटी है। यह सभी देशों और सभी शहरों के लिए सचेत हो जाने की चेतावनी है जहां बढ़ता वायु प्रदूषण स्तर बच्चों की मौत और बीमारी का बड़ा कारण बन गया है। इस चेतावनी का बिल्कुल स्पष्ट संदेश है कि जब तक वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्णायक कार्रवाई नहीं की जाएगी, दिल्ली की पिछले हफ्ते जैसी स्थिति आम समस्या बनकर पूरे विश्व में फैल सकती है।
दिल्ली में पिछले हफ्ते दिवाली के बाद वायु प्रदूषण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। पिछले 17 साल की तुलना में इस साल राजधानी की धुंध सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गई थी जिस वजह से शहर के 5,000 से स्कूल तीन दिन के लिए बंद करा दिए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के कुछ हिस्सों में प्रति घनमीटर वायु में खतरनाक तत्वों का वायु प्रदूषण स्तर 999 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया था और सुरक्षित मानक की तुलना में 15 से 17 गुना ज्यादा था। यूनिसेफ का मानना है कि वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों की चपेट में ले रहा है और यह सिर्फ दिल्ली के लिए चुनौती नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के शहरों की चिंता है।
चेतावनी भरे लफ्जों में एजेंसी ने कहा है कि 5 साल से कम उम्र के लगभग दस लाख बच्चों की मौत प्रति वर्ष निमोनिया से हो जाती है और इनमें से आधे से ज्यादा मामलों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है। वाराणसी और लखनऊ जैसे अन्य भारतीय शहरों की स्थिति भी हाल के दिनों में उतनी ही बदतर हुई है। पिछले एक साल के दौरान लंदन, बीजिंग, मेक्सिको सिटी, लॉस एंजिल्स और मनीला का वायु प्रदूषण स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है। दुनिया के 30 करोड़ बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां की आबोहवा का अधिकतम विषाक्त स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के छह गुना से भी अधिक है। यूनिसेफ के मुताबिक, लिहाजा सभी देशों को वायु प्रदूषण स्तर में कमी लाने के लिए अधिक ठोस उपाय करना चाहिए।