वैश्विक महामारी कोरोनो वायरस के खिलाफ भारतीय रक्षा उद्योग की ओर से उठाए गए कदमों की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सराहना की है। कोरोना की लड़ाई के लिए जरूरी उपकरण जैसे पीपीई, मास्क और वेंटिलेटर आदि के निर्माण में भारतीय रक्षा उद्योग काफी आगे निकल गया है।
रक्षामंत्री ने कहा कि अब हम पड़ोसी देशों की मदद के बारे में विचार कर सकते हैं। दरअसल, राजनाथ सिंह, वीरवार को सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) व रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस ई-कॉन्क्लेव में अपनी बात रख रहे थे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे लिए यह खुशी का अवसर है कि एसआईडीएम ने डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के साथ मिलकर कोरोना की लड़ाई के लिए जरूरी उपकरणों का निर्माण कार्य तेज कर दिया है। इन संगठनों ने पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट किट, मास्क और वेंटिलेटर तैयार करने में अपनी प्रतिभा दिखाई है।
दो महीने से भी कम समय में हमने न केवल अपनी घरेलू मांग को पूरा किया है, बल्कि हम आने वाले समय में पड़ोसी देशों की मदद करने के बारे में भी सोच सकते हैं। रक्षा मंत्री ने एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा, यह जीडीपी वृद्धि को गति प्रदान करता है। निर्यात के माध्यम से मूल्यवान विदेशी मुद्रा अर्जित करने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित करता है।
एमएसएमई को मजबूत रखना सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। हमारे कई संगठनों जैसे, आयुध कारखानों, डीपीएसयू और सेवा संगठनों में से 8,000 से अधिक एमएसएमई काम कर रही हैं। ये संगठन हमारे कुल उत्पादन में 20 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।
रक्षा उद्योग के समक्ष आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला में लॉकडाउन और व्यवधान के कारण विनिर्माण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। रक्षा क्षेत्र इसका कोई अपवाद नहीं है। यह कहा जा सकता है कि रक्षा क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक उग्र है, क्योंकि रक्षा उत्पादों का एकमात्र खरीदार सरकार है।
एसआईडीएम ने लॉकडाउन लागू होने के बाद विभिन्न मंत्रालयों और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बातचीत की है। इससे उन्हें रक्षा उद्योगों की समस्याओं को जानने का मौका मिला है। उनकी रोकथाम के लिए कई सुझाव भी प्राप्त हुए हैं।
सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है..
राजनाथ सिंह ने कहा कि चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा मंत्रालय ने उद्योगों, खासकर एमएसएमई के लिए कई कदम उठाए हैं। जैसे आरईपी/आरएफआई की प्रतिक्रिया तिथियों का विस्तार और लंबित भुगतानों की शीघ्र मंजूरी दिलाना आदि। उद्योगों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा कई वित्तीय सहायता उपायों की घोषणा की गई है।
रक्षा मंत्री ने आश्वासन देते हुए कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रेरित 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान भारतीय उद्योग को कई अवसर प्रदान करेगा। इससे लाखों नौकरियों के सृजन में मदद मिलेगी। अब एमएसएमई सेक्टर का विस्तार किया जा रहा है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के बीच कोई अंतर नहीं होगा।200 करोड़ रुपये या उससे कम मूल्य के सरकारी अनुबंध (खरीद) में, वैश्विक निविदाओं की अनुमति नहीं होगी।
इससे एमएसएमई को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा, जहां द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दो वर्षों के भीतर घरेलू रक्षा उद्योग विकसित हुआ, भारत को भी उसी तरह अपना रक्षा उद्योग विकसित करना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई से भारत को रक्षा प्रौद्योगिकियों में शीर्ष दस देशों में रखने के लिए काम करने का आग्रह किया है।