सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी माना है कि भारत-चीन सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। चीन ने जहां अपनी आक्रमकता बढ़ा दी है, वहीं मास्को से अच्छी खबर आ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू से हुई। दोनों नेताओं के बीच में करीब एक घंटे तक वार्ता हुई। इस दौरान खबर आ रही है कि रूस दोनों देशों भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात के साथ दोनों के बीच मधुर रिश्तों का भी पक्षधर है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर का 10 सितंबर को मास्को दौरा प्रस्तावित है। विदेश मंत्री वहां शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे। रूस के विदेश मंत्री सर्गे लावरोव भी चाहते हैं कि विदेश मंत्री एस जयशंकर मास्को में एससीओ की बैठक में हिस्सा लें। पहले विदेश मंत्री की तरफ से चीन के साथ लद्दाख में चल रहे तनाव के मद्देनजर संकोच किया जा रहा था।
जून महीने में वर्चुअल मीटिंग के दौरान भी भारत ने चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। जून में भी रूस ने दोनों देशों (भारत-चीन) के बीच में व्यवहारिक रिश्ते पर जोर दिया था। समझा जा रहा है कि 10 सितंबर को एस जयशंकर के रूस दौरे के दौरान राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बेहद विश्वस्त मंत्रियों में एक विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भेंट होगी।
चीन के सामने आगे कुआं, पीछे खाई जैसी स्थिति पैदा होती जा रही है। एक तरफ भारत के साथ लद्दाख में युद्ध जैसे हालात का खतरा बना हुआ है तो दूसरी तरफ अन्य पड़ोसी देशों ने भी चीन से अपनी चिंताओं को लेकर आवाज उठाना शुरू किया है। ताइवान द्वारा दक्षिण सागर में चीन के फाइटर जेट सुखोई-35एस को मार गिराने की खबरें आ रही है।
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी चीन पर पड़ोसियों को धमकाने-डराने का आरोप लगाया है। कनाडा, आस्ट्रेलिया ने भी चीन को आक्रामक नीतियों से बचने की सलाह दी है। राजनयिक सूत्र बताते हैं कि चीन जितना भारत को घेरने की कोशिश की है, उससे कहीं ज्यादा वह तमाम मोर्चे पर घिरता जा रहा है। ऐसे में भारत से उसके लिए चुनौती देना बहुत आसान नहीं रहने वाला है।