भारत के बाहरी सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों के बीच रक्षा मंत्रालय जल्द ही स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन और अलग से रक्षा साइबर एवं स्पेस एजेंसियों का गठन करेगा। रक्षा सचिव संजय मित्रा ने शीर्ष सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में यह बात कही। ये एजेंसियां सेना, वायुसेना और नौसेना के त्रिकोणीय सेवा ढांचे के तहत आएंगी।
रक्षा नीति निर्धारकों की दो दिन तक चली वार्षिक एकीकृत कमांडर्स कांफ्रेंस मंगलवार को समाप्त हो गई। इस दौरान नई एजेंसियों की स्थापना और ओवरआल सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, कांफ्रेंस के दौरान रक्षा सचिव ने कहा कि रक्षा साइबर एवं स्पेस एजेंसियां और स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन जल्द ही हकीकत बन जाएगा।
कांफ्रेंस के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने ऑपरेशनल योजनाओं को मिलकर अमल में लाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कोई भी नया ढांचा तैयार करने के दौरान दृढ़ लागत लाभ विश्लेषण सुनिश्चित करने के लिए सभी को प्रोत्साहित करने की बात कही। एडमिरल लांबा सेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुखों की चीफ्स ऑफ स्टॉफ कमेटी (सीओएससी) के चेयरमैन भी हैं।
इस सम्मेलन में रक्षा मंत्री अरुण जेटली, एनएसए अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ सैन्य कमांडर शामिल हुए। सभी ने क्षेत्रीय शक्ति का प्रदर्शन एवं देश के सामने खड़ी सुरक्षा चुनौतियों का जायजा लिया। मंत्रालय के मुताबिक, कांफ्रेंस के दौरान सभी संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।
इनमें सुरक्षा बलों के बीच ऑपरेशनल तालमेल को बढ़ाना और सैन्यकर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को विस्तार देना शामिल है।