रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा, हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, संपर्क, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और प्राकृतिक आपदा, आतंक व पाइरेसी जैसे चुनौतियों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर जोर दिया जाना चाहिए।
एयरो इंडिया शो से इतर राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत कई तरह की मिसाइल प्रणाली, हल्के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, बहुआयामी हल्के मालवाहक विमान, युद्धपोत और गश्ती पोत, तोप, टैंक, रडार, सैन्य वाहन, इलेक्ट्रॉनिक जंगी प्रणाली और अन्य हथियार प्रणाली की आपूर्ति करने के लिए तैयार है।
राजनाथ ने बंगलूरू में हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) देशों के रक्षामंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, कई चुनौतियों को सम्मेलन के समक्ष रखा गया। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत सभी मित्र देशों के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार है। अभी सबसे बड़ा लक्ष्य विकास और समृद्धि के हमारे साझा सपने को हकीकत में बदलना है। उन्होंने कहा, जहां तक भारत का संबंध है, हम हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक हैं। इसके लिए भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल सक्रिय हैं। कई अवसरों पर उन्होंने इसका उदाहरण भी पेश किया। वहीं, समुद्री लुटेरों के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए विशेष जहाजों की तैनाती की गई है।
40 से अधिक देशों की मेजबानी करता है आईओआर
रक्षा मंत्री ने कहा, विशाल हिंद महासागर 40 से अधिक देशों की मेजबानी करता है। साथ ही यह ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के पूर्वी तट को भी छूता है। इस बार 28 आईओआर देशों में से 25 ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। ये एक साथ काम करने की हमारी सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
आईओआर क्षेत्र में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व में भारत की सक्रिय भूमिका
राजनाथ ने कहा, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा देश है और भारत की 7,500 किलोमीटर की विशाल तट रेखा है। इस क्षेत्र के सभी देशों के शांतिपूर्ण और समृद्ध सह-अस्तित्व के लिए भारत को सक्रिय भूमिका निभानी है। इसके अलावा भारत ने पर्यटन को भी बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां अपनाई हैं।
शांति, सुरक्षा और सहयोग में वृद्धि करना आईओआर का अहम मकसद
इस बार आईओआर सम्मेलन का मुख्य मुद्दा हिंद महासागर में शांति, सुरक्षा और सहयोग में वृद्धि करना था। जिसमें मालदीव, कोमोरोस, ईरान, मेडागास्कर समेत के कई देशों के रक्षा मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही कई देशों के मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से इस सम्मेलन में शिरकत की।