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बजट सत्र: सरकार का फोकस डीपीएसयू को मजबूत करने पर, राजनाथ बोले- कमजोर करने का कोई सवाल ही नहीं

Mon, 28 Mar 2022 05:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार आज भी डीपीएसयू को लगभग 80 प्रतिशत ऑर्डर दिए जाते हैं। डीपीएसयू को कमजोर करने का कोई सवाल ही नहीं है।
 
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राज्यसभा में राजनाथ सिंह - फोटो : संसद टीवी
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विस्तार
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सरकार रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत कर रही है, उन्हें कमजोर करने का कोई सवाल ही नहीं है। ये बात राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कही। उन्होंने सोमवार को कहा कि रक्षा क्षेत्र में काम कर रही सरकारी कंपनियों के कमजोर होने का सवाल ही नहीं उठता। सरकार उन्हें इक्विटी समर्थन के साथ मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार डीपीएसयू को उच्च स्तरीय ऑर्डर दे रही है।

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राज्यसभा में बोले राजनाथ
उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, हमारी सरकार इक्विटी समर्थन के साथ सभी डीपीएसयू (रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) को मजबूत कर रही है। हम उनकी प्रतिबद्ध देनदारियों को भी साफ कर रहे हैं ताकि किसी भी तरीके से हमारे डीपीएसयू कमजोर न हों। 
उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार आज भी डीपीएसयू को लगभग 80 प्रतिशत ऑर्डर दिए जाते हैं। डीपीएसयू को कमजोर करने का कोई सवाल ही नहीं है।

अजय भट्ट बोले- सरकार उठा रही कदम
इस दौरान रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि रक्षा क्षेत्र उच्च तकनीक और नवाचार से संचालित होता है, उन्होंने कहा कि डीपीएसयू को भी उत्पादन के आदेश दिए जाते हैं, यहां तक कि उन क्षेत्रों में एफडीआई की अनुमति दी गई है जहां देश में विशेषज्ञता और क्षमता नहीं है।
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उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कदम उठा रही है। इसलिए, सरकार ने आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को सात नई सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में विभाजित किया है। मंत्री ने आगे कहा कि रक्षा क्षेत्र को निजी फर्मों के लिए खोलने से देश को फायदा हो रहा है। इसके फलस्वरूप ही रक्षा और एयरोस्पेस में एफडीआई में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि 2001 से 14 वर्षों के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 1,382 करोड़ रुपये था, जो मोदी सरकार के सात वर्षों में बढ़कर 3,343 करोड़ रुपये हो गया है।

घरेलू उत्पादन को दिया जा रहा बढ़ावा
रक्षा में एफडीआई खुलने के बाद कम निवेश होने पर एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के तहत 209 रक्षा वस्तुओं की एक सूची बनाई है।उन्होंने कहा कि 2022-23 के केंद्रीय बजट में पूंजीगत खरीद बजट का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योगों के लिए अलग रखा गया है।
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों पर भट्ट ने कहा कि सरकार ने दो रक्षा औद्योगिक गलियारे बनाए हैं, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में है। भारत दुनिया के 72 देशों को निर्यात कर रहा है और दुनिया के शीर्ष 35 रक्षा निर्यातक देशों में शामिल है।

शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए राज्यों से की अपील
वहीं, लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकारों को सभी राज्यों में स्कूलों में सुधार के लिए पहल करनी चाहिए। प्रधान ने देश भर में राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में सुधार के लिए पिछले बजट में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 3,500 करोड़ रुपये के उचित उपयोग के लिए सांसदों से पहल करने की भी अपील की।

यूक्रेन से लौटने वाले मेडिकल छात्रों का करियर को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग
लोकसभा में भाजपा के एक सांसद ने सोमवार को यूक्रेन से लौटने वाले मेडिकल छात्रों के करियर को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। हरियाणा से भाजपा सदस्य नायब सिंह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से हस्तक्षेप करने की मांग की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन मेडिकल छात्रों का करियर प्रभावित न हो।
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गौरतलब है कि 24 फरवरी से शुरू हुए रूसी आक्रमण के बाद यूक्रेन से लगभग 22,000 मेडिकल छात्रों को भारत वापस लाया गया है।

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