रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के कारण उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए देश को तैयार करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। बदलते समय के अनुसार खुद को ढालने की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, समय के साथ परिवर्तन जरूरी है, लेकिन देश के गौरवशाली अतीत से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अपनी संस्कृति और परंपराओं की जड़ों से जुड़े रहकर एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत का निर्माण करना है।
रक्षा मंत्री ने दिल्ली कैंट में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा किया। उन्होंने शिविर में भाग ले रहे करीब 2,000 कैडेट्स से नए रास्तों की पहचान करने और राष्ट्र को तीव्र गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ने में सहायता करने की अपील की। साथ ही उनसे देश के सदियों पुराने मूल्यों और परंपराओं से जुड़े रहने तथा अपनी पसंद के क्षेत्र में विनम्रता के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं से ‘यूज एंड थ्रो’ की संकल्पना को खत्म करने की भी अपील की। कहा, इस प्रथा के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समाज एवं पर्यावरण को सबसे अधिक हानि उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का विनाश जीवन का विनाश है। उन्होंने युवाओं और राष्ट्र से वस्तुओं का यथासंभव पुन: उपयोग करने तथा प्रकृति के संरक्षण के लिए काम करने का आह्वान किया। कहा कि जहां ज्ञान और शिक्षा महत्वपूर्ण हैं, वहीं जीवन मूल्यों का भी इसी के समान महत्व है।
राजनाथ ने देश की पुख्ता सुरक्षा अवसंरचना को टीमवर्क के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक बताया। कहा, जहां सशस्त्र बल सभी प्रकार के खतरों से देश की रक्षा कर रहे हैं, वहीं वैज्ञानिक, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और दूसरे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर हरसंभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं। यदि कभी युद्ध लड़ने की जरूरत पड़ी तो पूरा देश हमारे सशस्त्र बलों के पीछे खड़ा होगा। यह टीमवर्क का परिणाम है कि भारत ने अतीत में अपने शत्रुओं को पराजित किया है और कई युद्ध जीते हैं।
एकजुट होकर काम करने से दोगुनी हो जाती है शक्ति
रक्षा मंत्री ने कहा, विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के बावजूद सभी भारतीय सामने आकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करते हैं। भारत के निरंतर विश्व के अग्रणी देशों में से एक बनने की ओर बढ़ने के पीछे यह एक प्रमुख कारण है। इस पहलू को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। एकजुट होकर काम करने से शक्ति दोगुनी हो जाती है। सफलता की संभावना बढ़ जाती है और अहंकार की भावना नष्ट होती है। एनसीसी कैडेट्स को अहंकार को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए और सदैव देश और समाज के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।
युवा जितने मजबूत होंगे, देश उतना शक्तिशाली होगा : रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति का पथ युवाओं से होकर जाता है। हमारे युवा जितने मजबूत होंगे, हमारा देश उतना ही शक्तिशाली होगा। उन्होंने कैडेट्स से आग्रह किया कि वे जितना ज्ञान प्राप्त करने और धन अर्जित करने पर ध्यान देते हैं, उतना ही चरित्र निर्माण पर भी ध्यान दें। उन्होंने विश्वास जताया कि कैडेट अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और मूल्यों के साथ सफलता की ऊंचाइयों को छूएंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।
एनसीसी की सराहना की
रक्षा मंत्री ने एक नेता, सैनिक, कलाकार और सबसे बढ़कर एक अच्छे इंसान के गुणों को विकसित कर अपने कैडेटों को एक सर्वगुणसंपन्न व्यक्तित्व में बदलने के लिए एनसीसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनसीसी में सिखाई गई एकता, अनुशासन, सच्चाई, साहस, सद्भाव, नेतृत्व और टीमवर्क हमेशा हमारे देश का पथ-प्रदर्शक रहा है। कुछ सबसे महत्वपूर्ण गुण जो एनसीसी अपने कैडेट्स में आत्मसात करता है, वह एक वांछित लक्ष्य हासिल करने, टीम भावना का विकास करने और विफलता के डर से मुक्ति पाने के लिए दृढ़ संकल्प है।
कैडेट्स को उनके असाधारण प्रदर्शन एवं कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए रक्षा मंत्री पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इस वर्ष रक्षा मंत्री पदक पूर्वोत्त क्षेत्र निदेशालय के अवर अधिकारी तिंगगेचिले नरीमे और राजस्थान निदेशालय के कैडेट अविनाश जांगिड़ को प्रदान किया गया। रक्षा मंत्री प्रशस्ति पत्र ओडिशा निदेशालय के कैप्टन प्रताप केशरी हरिचंदन, तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा अंडमान और निकोबार निदेशालय के कैडेट अवर अधिकारी जेनी फ्रांसिना विक्टर आनंद, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख निदेशालय के कैडेट फिजा शफी तथा उत्तराखंड निदेशालय के कैडेट सहवाग राणा को प्रदान किए गए।
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए : एनसीसी कैडेट्स की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए गए। रक्षा मंत्री ने सेना, नौसेना और एनसीसी के वायुसेना के विंग से लिए गए एनसीसी कैडेट्स के एक दल की प्रस्तुत सलामी गारद का भी निरीक्षण किया।